आगरा के पिनाहट क्षेत्र में चंबल का पानी खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर, गांव डूबे, पलायन शुरू

पिनाहट (आगरा)। राजस्थान और मध्य प्रदेश में हो रही भारी बारिश के चलते चंबल नदी का रौद्र रूप एक बार फिर सामने आने लगा है। कोटा बैराज और बनास नदी बांध से भारी मात्रा में छोड़ा गया पानी अब आगरा जनपद के पिनाहट क्षेत्र में खतरे की घंटी बजा चुका है। नदी का जलस्तर कल ही खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर था, जो आज सुबह दो मीटर और बढ़ गया है। अब चंबल खतरे के निसान से तीन मीटर ऊपर बह रही है। तमाम गांवों में पानी प्रवेश कर चुका है। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर डाल दिया है और एसडीआरएफ को तैनात कर दिया गया है।

Jul 31, 2025 - 11:33
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आगरा के पिनाहट क्षेत्र में चंबल का पानी खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर, गांव डूबे, पलायन शुरू
चंबल नदी में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ग्रस्त पिनाहट क्षेत्र की कुछ तस्वीरें, जिनमें डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी भी हैं, जिन्होंने कल इस क्षेत्र का दौरा किया था.

2019 और 2022 की बाढ़ की पुनरावृत्ति का खतरा

चंबल नदी में इससे पहले 2019 और 2022 में भी भयंकर बाढ़ आई थी। इस बार भी उसी स्तर की स्थिति बनती दिख रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने चंबल किनारे बसे दर्जनों गांवों को घेर लिया है। पिनाहट की उमरैठा पुरा बस्ती पूरी तरह से प्रभावित है जहां कई घरों में पानी घुस चुका है और लोग खाद्य सामग्री और मवेशियों के साथ पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

बीहड़ और खेतों में भरा पानी, संपर्क टूटा

तमाम गांवों का संपर्क टूट चुका है, बीहड़ क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं और खेतों में पानी भर गया है। दर्जनों घर डूब चुके हैं। गोहरा भटपुरा गांव में नावों का संचालन शुरू कर दिया गया है। राजस्व विभाग की टीमें मुस्तैद हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

बनास नदी बांध के छह गेट खुले, और बिगड़ सकते हैं हालात

राजस्थान के बनास बांध के 6 गेट खोल दिए गए हैं, जिससे चंबल में और जलप्रवाह बढ़ने की आशंका है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि शाम से जलस्तर में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन तब तक हर क्षण सतर्कता जरूरी है। एसडीआरएफ और पुलिस बल को सक्रिय कर दिया गया है।

क्षेत्र के निवासी सुदेश ने बताया कि गांवों में हालत बहुत खराब हो चुकी है। तमाम घरों में पानी घुस गया है। ऐसे में लोग अपने घर का सामान और मवेशियों को लेकर पास ही स्थित एक ऊंचे टीले पर शरण लिए हुए हैं। प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। 

SP_Singh AURGURU Editor