चातुर्मास आरंभ: श्रीहरि योगनिद्रा में, चार महीने तक मांगलिक कार्यों पर विराम

आगरा। आज से चातुर्मास का आरंभ हो गया है। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली देवशयनी एकादशी हिन्दू पंचांग के अनुसार एक महत्वपूर्ण तिथि है, जब से आगामी चार महीने तक सभी मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

Jul 6, 2025 - 18:53
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चातुर्मास आरंभ: श्रीहरि योगनिद्रा में, चार महीने तक मांगलिक कार्यों पर विराम

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-देवशयनी एकादशी पर शुभ योगों का संयोग, संतों-मुनियों ने शुरू किया स्थायी प्रवास

दैवज्ञ पं. बृज मोहन दीक्षित ने बताया कि इस वर्ष चातुर्मास का शुभारंभ अत्यंत दुर्लभ संयोगों के साथ हुआ है। इस दिन साध्य, शुभ, त्रिपुष्कर और रवि योग एक साथ बनने से यह दिन विशेष महत्व का हो गया। यह संयोजन आध्यात्मिक साधना और व्रत उपवास करने वालों के लिए श्रेष्ठ माना जा रहा है।

क्या होता है चातुर्मास?

चातुर्मास का अर्थ है ‘चार महीने’। यह वह अवधि होती है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवकार्य स्थगित हो जाते हैं। इसी कारण इस अवधि में शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण आदि सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसके साथ ही नए व्यापार या किसी नए उपक्रम की शुरुआत भी वर्जित मानी जाती है।

साधना और संयम का समय

चातुर्मास को धार्मिक आचरण, व्रत, संयम और आत्मचिंतन का समय माना गया है। इस दौरान प्याज, लहसुन, मांसाहार, मद्यपान आदि से पूर्ण परहेज करना चाहिए। केवल सात्विक और शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करने की परंपरा है।

संतों का एक स्थान पर ठहराव

बरसात के इन महीनों में हिंदू संतों व जैन मुनियों की यात्रा व आवागमन भी वर्जित हो जाता है। संत-मुनि इस अवधि में एक ही स्थान पर प्रवास करते हैं। इसका कारण पर्यावरणीय और धार्मिक दोनों है। इस समय वर्षा के कारण कीट-पतंगे, जीव-जंतु भूमि पर अधिक मात्रा में निकल आते हैं। इसलिए ऐसा माना गया है कि संतों का आवागमन उनके जीवन को अनजाने में हानि पहुंचा सकता है, जो अहिंसा के सिद्धांत के विरुद्ध है।

धार्मिक आयोजनों का बढ़ेगा महत्व

इन चार महीनों में विभिन्न एकादशी व्रत, श्रावण मास की शिव आराधना, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दीपावली तक के पर्व मनाए जाते हैं। यह समय आध्यात्मिक उन्नति, संयम और सत्संग के लिए विशेष माना गया है।

SP_Singh AURGURU Editor