भारत की सुरक्षा परिषद की सदस्यता पर चीन फिर मुकर गया, बीजिंग ने नहीं किया कोई जिक्र

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के लिए भारत अरसे से कोशिश कर रहा है। मगर, उसकी यह कोशिश हर बार असफल हो जाती है। इस बार भी चीन ने अपने बयान में सुरक्षा परिषद की सदस्यता के मुद्दे का जिक्र नहीं किया।

Feb 11, 2026 - 19:30
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भारत की सुरक्षा परिषद की सदस्यता पर चीन फिर मुकर गया, बीजिंग ने नहीं किया कोई जिक्र


 

नई दिल्ली। भारत और चीन दोनों ने सीमा पर शांति और भाईचारे की प्रगति पर संतोष जताया। भारतीय विदेश मंत्रालय के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से यह बयान दिया गया कि चीन ने कहा है कि वह भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सदस्यता की आकांक्षा को समझता है और सम्मान करता है।

जबकि चीन ने अपने बयान में इस पर कोई जिक्र ही नहीं किया। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से एक चीन भी है, जो भारत की स्थायी सदस्यता की राह में अड़ंगा लगाता रहा है। चीन के साथ-साथ पाकिस्तान और तुर्की ने कॉफी क्लब बना रखा है, जो भारत की राह में रोड़े अटकाते रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हालिया सैन्य गतिरोध के बाद यह पहली बार है जब चीन ने इस तरह की स्वीकृति दी है, लेकिन फिर भी यह भारत के पक्ष को स्पष्ट रूप से समर्थन देने से बचता है। हालांकि, चीनी बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया गया।  

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अभी 5 स्थायी सदस्य हैं। ये अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन हैं। इनमें अमेरिका-ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का कई मौकों पर पुरजोर समर्थन किया है।

मगर, चीन हमेशा से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का विरोध करता आया है। खासतौर पर वह भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर टालता रहा है। 2022 में भी चीन के चलते ही भारत की ऐसी कोशिश फेल हो गई थी।

अतीत में भी चीन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका की बात मानी थी। 2014 में जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे, उस वक्त भी एक साझा बयान में बीजिंग ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र और यहां तक कि सुरक्षा परिषद में भारत की बड़ी भूमिका का चीन समर्थन करता है।

2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद से चीन ने पहली बार इस तरह का बयान दिया है। हालांकि, चीनी बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया गया। मा झाओक्सू 8 से 10 फरवरी तक चलने वाली ब्रिक्स शेरपा मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे।

सुरक्षा परिषद की स्थापना संयुक्त राष्ट्र के तहत ही हुई थी। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, इसका 4 मुख्य उद्देश्य है- अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना, राष्ट्रों के बीच दोस्ताना रिश्तों को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को सुलझाने में मदद करना और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना तथा राष्ट्रों की गतिविधियों में सामंजस्य स्थापित करने का केंद्र बनना।