‘जनकवि’ नजीर अकबराबादी की उपेक्षित विरासत पर उठा शहर का गुस्सा—हस्ताक्षर अभियान से सरकार को चेतावनी, स्मारक से मेट्रो तक नाम देने की मांग तेज

आगरा। ताज नगरी की गंगा-जमुनी तहजीब और लोक संस्कृति के प्रतीक ‘जनकवि’ नजीर अकबराबादी की विरासत को संरक्षित करने के लिए अब शहर में एक जनआंदोलन आकार लेने लगा है। अमृता विद्या एजुकेशन फॉर इम्मॉर्टैलिटी संस्था ने उनकी उपेक्षित स्मृतियों और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य सरकार को जगाना और नजीर की विरासत को ‘नई विरासत’ के रूप में स्थापित कराना है।

Mar 31, 2026 - 19:16
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‘जनकवि’ नजीर अकबराबादी की उपेक्षित विरासत पर उठा शहर का गुस्सा—हस्ताक्षर अभियान से सरकार को चेतावनी, स्मारक से मेट्रो तक नाम देने की मांग तेज
जनकवि नजीर अकबराबादी की उपेक्षित विरासत को सम्मान दिलाने के लिए चर्चा करते शहर के प्रबुद्धजन।

नई शुरुआत, पुराने प्रयासों को जोड़ने की पहल

संस्था के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने बताया कि यह अभियान भले ही नई शुरुआत है, लेकिन इसे शहर में पहले हुए प्रयासों की अगली कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नजीर अकबराबादी की धर्मनिरपेक्ष और लोक-केंद्रित कविताएं उन्हें ‘अवामी शायर’ बनाती हैं, जिनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

सरकार से सीधी मांग- स्मारक, पाठ्यक्रम और संरक्षण

हस्ताक्षर अभियान के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं कि नजीर अकबराबादी की स्मृति में विशेष स्मारकों और पुस्तकालयों का निर्माण व जीर्णोद्धार हो। उनकी रचनाओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए। ताजगंज की मलको गली स्थित उनकी मजार और संबंधित स्थलों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

संस्था का मानना है कि नजीर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय समाज की एकता और भाईचारे की सशक्त आवाज थे, इसलिए उनकी विरासत का संरक्षण जरूरी है।

ताजमहल से नजीर अकबराबादी का गहरा जुड़ाव था। इसी प्रेम के चलते उन्होंने जीवनभर आगरा नहीं छोड़ा और अपनी रचनाओं में शहर की संस्कृति, गलियों और जनजीवन को अमर कर दिया।

जनकवि’ की पहचान—आम आदमी की आवाज

नजीर अकबराबादी की कविताओं में त्योहारों, मेलों, जीवन दर्शन और आम जनमानस के सुख-दुख का जीवंत चित्रण मिलता है। वे गली-कूचे के विक्रेताओं के लिए तुकबंदी वाले शेर लिखकर उनकी आजीविका में भी सहयोग करते थे, जो उन्हें जनता का सच्चा कवि बनाता है।

कृष्ण भक्ति और सांस्कृतिक समरसता का अद्भुत संगम

नजीर की रचनाओं में भगवान कृष्ण के प्रति गहरी श्रद्धा झलकती है, जो उन्हें रसखान की परंपरा से जोड़ती है। उनकी शायरी भारतीय सांस्कृतिक एकता और धर्मनिरपेक्षता का मजबूत स्तंभ मानी जाती है।

मेट्रो स्टेशन से सड़क तक—नामकरण की मांग तेज

संस्था ने मांग रखी है कि आगरा मेट्रो के किसी प्रमुख स्टेशन का नाम ‘नजीर अकबराबादी मेट्रो स्टेशन’ रखा जाए। साथ ही मेट्रो स्टेशनों की दीवारों पर उनकी प्रसिद्ध नज्म—"आशिक कहो, असीर कहो, आगरे का है..."
को प्रदर्शित किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक शहर की असली सांस्कृतिक पहचान से रूबरू हो सकें। इसके अलावा पुरानी मंडी से मलको गली तक के मार्ग का नाम ‘नजीर अकबराबादी मार्ग’ रखने की भी मांग की गई है।

मजार से शुरू हुआ अभियान, जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगी आवाज

हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत मलको गली स्थित नजीर अकबराबादी की मजार से की गई। इस दौरान मियां फैज शाह, आरिफ तैमूरी और असलम सलीमी सहित कई लोग उपस्थित रहे। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि जल्द ही इस मुहिम को जनप्रतिनिधियों से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

नजीर पर फिल्म बनाने की तैयारी

आगरा के साहित्य प्रेमियों द्वारा ‘जनकवि’ नजीर अकबराबादी पर एक डॉक्यूमेंट्री ड्रामा फिल्म बनाने की भी तैयारी शुरू हो गई है। इस क्रम में मिथुन प्रमाणिक द्वारा बनाए गए प्रोमो फिल्म का अवलोकन कर चर्चा की गई। चर्चा में सुधीर नारायण, डॉ. मधु भारद्वाज, फैज शाह, डॉ. विजय शर्मा, आरिफ तैमूरी, शांतनु, अजय तोमर, असलम सलीमी और अनिल शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor