भारतीयता का नागरिक बोध ही संविधान की आत्माः संविधान के 75 वर्ष पर संगोष्ठी, ‘मन की पीर’ का विमोचन, विचार–संवेदना का सशक्त संगम

आगरा। भारतीय संविधान की मूल भावना, उसकी सांस्कृतिक जड़ें और नागरिक चेतना में भारतीयता की प्रतिष्ठा, आदि विषयों के इर्द-गिर्द संस्कार भारती जिला आगरा द्वारा संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक गरिमामय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसी मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार राजबहादुर सिंह ‘राज’ की काव्य कृति “मन की पीर” का विमोचन संपन्न हुआ।

Jan 4, 2026 - 21:38
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भारतीयता का नागरिक बोध ही संविधान की आत्माः संविधान के 75 वर्ष पर संगोष्ठी, ‘मन की पीर’ का विमोचन, विचार–संवेदना का सशक्त संगम
केंद्रीय हिंदी संस्थान के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में रविवार को आयोजित संगोष्ठी में मौजूद अतिथिगण और साहित्यकार।

कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय हिंदी संस्थान स्थित अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय सभागार में किया गया, जो विचार, साहित्य और संविधान की मूल चेतना का साक्षी बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। यह औपचारिकता कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच, जय सिंह नीरद, संस्कार भारती के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुभाष चंद्र अग्रवाल एवं वरिष्ठ प्रचारक बांकेलाल द्वारा संपन्न की गई।

इसके पश्चात भावना द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई, जबकि गुरप्रीत कौर, वंदना वरुण, विभा चौहान, पल्लवी एवं देविका ने संगीत के साथ संस्कार भारती का ध्येय गीत प्रस्तुत कर वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।

काव्य कृति “मन की पीर” का विमोचन करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने कहा कि शब्द केवल संग्रह से नहीं, साधना से अर्जित होते हैं। उन्होंने पुस्तक में संकलित गीतों की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य संवेदना को आकार देता है और समाज को दिशा देता है।

पुस्तक में शामिल गीत “अब तो सांझ ढलने को है” का भावपूर्ण गायन लीना परमार ने हरिओम माहौर और गजेन्द्र चौहान की संगत में किया, जिसे श्रोताओं ने मुक्त कंठ से सराहा।

प्रो. कुलकर्णी ने कहा कि सोशल मीडिया के इस युग में ज्ञान भले ही सुलभ हो गया हो, लेकिन पुस्तक आज भी संस्कारों की संवाहक है और उसकी आवश्यकता सार्वकालिक है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अनंत चौहान विश्वेंद्र ने संविधान की मूल भावना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान निर्माता भारतीय परंपराओं, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना से गहरे जुड़े हुए थे।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीयता का नागरिक बोध में प्रतिष्ठित होना ही संविधान का मूल उद्देश्य है। उनका कहना था कि संविधान केवल विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन का संवैधानिक रूप है।

कार्यक्रम में प्रांतीय कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल, प्रांतीय मंत्री डॉ. मनोज पचौरी, ई. प्रखर अवस्थी, ताहिर सिद्दीकी, रक्षपाल सिंह परमार एवं गुंजन जादौन ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री यतेन्द्र सोलंकी ने प्रभावी ढंग से किया।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. केशव शर्मा, विजय कुमार गोयल, प्रो. सपना गुप्ता, डॉ. ममता बंसल, डॉ. सरोज भार्गव, साधना सिंह, डॉ. आभा गुप्ता, हरिमोहन कोटिया, संजीव वशिष्ठ, डॉ. यशोयश, राकेश पाठक, रुचि चतुर्वेदी, डॉ. बृज बिहारी ‘बिरजू’, योगेन्द्र शर्मा ‘योगी’, नंदकिशोर, बालकृष्ण पचौरी सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

अंत में जिलाध्यक्ष रामावतार यादव ने सभी आगंतुकों, अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

SP_Singh AURGURU Editor