15 मिनट की बारिश में डूबा ‘विकास’ का दावा, यमुना विहार फेस-2 में नालों का गंदा पानी घरों में घुसा

आगरा के यमुना विहार फेस-2 में शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को महज 15 मिनट की बारिश ने कॉलोनीवासियों की जिंदगी को नरक बना दिया। नालों का गंदा पानी, कीचड़, सिल्ट और यहां तक कि मरे हुए मवेशी भी बारिश के साथ कॉलोनी में घुस आए। करीब 100 मकान गंभीर रूप से प्रभावित हुए, घरों में पानी भरने से फर्नीचर, कपड़े और जरूरी दस्तावेज खराब हो गए। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। अब लोग नगर निगम और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मानसून से पहले स्थायी जल निकासी व्यवस्था की जाए, वरना बड़ा हादसा हो सकता है।

Apr 4, 2026 - 21:23
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15 मिनट की बारिश में डूबा ‘विकास’ का दावा, यमुना विहार फेस-2 में नालों का गंदा पानी घरों में घुसा
शुक्रवार को 15 मिनट की बारिश में यमुना विहार फेस-2 का हाल।

आगरा की चमक-दमक के बीच मूलभूत सुविधाओं से वंचित सैकड़ों परिवार, जलभराव, सड़ांध, मरे मवेशी, बीमारी और जहरीले जीवों के खतरे से दहशत में लोग, रात 12 बजे तक घुटनों पानी में हुई बैठक

आगरा। एक तरफ चमक दमक वाले आगरा के दावे हैं,  दूसरी तरफ मूलभूत अधिकारों से वंचित नागरिक। आगरा में एक कॉलोनी ऐसी भी है, जहां के लोग सम्मानजनक जीवन भी नहीं जी सकते।

आगरा शहर को विकास, सौंदर्यीकरण और स्मार्ट सुविधाओं के दावों के साथ पेश किया जाता है, लेकिन शहर की तस्वीर का एक कड़वा सच यमुना विहार फेस-2 में दिखाई देता है। यहां के लोग न सिर्फ मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार भी मानो उनसे छिन गया है।

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को हुई महज 15 मिनट की बारिश ने इस कॉलोनी की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी। सड़कों पर जलभराव हुआ, नालों का गंदा पानी तेज बहाव के साथ कॉलोनी में घुसा और कुछ ही मिनटों में हालात इतने भयावह हो गए कि लोगों के घरों में कीचड़, सिल्ट, दुर्गंध और सड़ांध भर गई।

घरों में घुसा नालों का पानी, फर्नीचर तैरने लगा

अचानक हुई बारिश ने लोगों को अपना सामान सुरक्षित करने तक का मौका नहीं दिया। कई घरों में अलमारी, दीवान और कमरों में रखा सामान भीग गया। जरूरी दस्तावेज, कपड़े, घरेलू सामान और फर्नीचर खराब हो गए।

कॉलोनीवासियों के मुताबिक, पानी का बहाव इतना तेज था कि बाहर की कॉलोनियों और नालों का सारा गंदा पानी सीधे उनके घरों की ओर मोड़ दिया गया। कई घरों में फर्नीचर तक तैरने लगा और भीतर सीलन व सड़ांध फैल गई। लोगों को इस कदर डर लगने लगा कि वे जान-माल की सुरक्षा को लेकर दहशत में आ गए।

मरे हुए मवेशी तक बहकर आए, दहशत में महिलाएं और बच्चे

कॉलोनीवासियों का कहना है कि बारिश के साथ केवल पानी ही नहीं, बल्कि मरे हुए मवेशी, कचरा, गंदगी, सिल्ट और नाले की कीचड़ भी बहकर कॉलोनी के भीतर आ गई। यह दृश्य इतना भयावह था कि परिवारों में दहशत फैल गई। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चिंता बढ़ गई। लोगों ने बताया कि अगर बारिश कुछ देर और जारी रहती, तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती थी। कई परिवारों ने तो भगवान से बारिश रुकने की प्रार्थना तक की।

घुटनों पानी में रात 12 बजे तक बैठक, सुबह पार्षद के दफ्तर पहुंचे लोग

बारिश थमने के बाद भी कॉलोनीवासियों की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। जैसे-तैसे लोग घरों से बाहर निकले और घुटनों-घुटनों पानी व कीचड़ में खड़े होकर हालात पर चर्चा की। रात 12 बजे तक कॉलोनी में बैठकों का दौर चलता रहा। लोगों ने तय किया कि सुबह होते ही वे क्षेत्रीय पार्षद से मिलकर अपनी पीड़ा रखेंगे।

अगली सुबह कॉलोनीवासी एकजुट होकर क्षेत्रीय पार्षद कंचन बंसल और पवन बंसल के कार्यालय पहुंचे। बातचीत के दौरान पार्षदों ने कहा कि साफ-सफाई की व्यवस्था कराई जा सकती है, लेकिन स्थायी जल निकासी का समाधान बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

पिछले साल भी गुहार, इस साल भी वही दर्द

कॉलोनीवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ। पिछले कई वर्षों से हर बारिश में यही त्रासदी दोहराई जाती है। पिछले साल भी वे विधायक, नगर आयुक्त, पार्षद और अन्य अधिकारियों से मिल चुके हैं। लिखित शिकायतें भी दी गईं, लेकिन नतीजा सिर्फ खोखले आश्वासन निकला।

इस बार स्थिति पहले से ज्यादा खराब है। लोगों का आरोप है कि कॉलोनी के आसपास हाल ही में हुए सड़क और नाले निर्माण कार्यों के दौरान सही प्लानिंग नहीं की गई। यदि उस समय जल प्रवाह और निकासी का वैज्ञानिक आकलन किया जाता, तो शायद आज यह कॉलोनी डूबने से बच जाती।

विकास बाहर, तबाही अंदर, कॉलोनीवालों का फूटा गुस्सा

स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी के आसपास विकास कार्य जरूर हो रहे हैं, लेकिन यमुना विहार फेस-2 को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि बाहरी सड़कों और नालों के निर्माण ने पानी का प्राकृतिक बहाव बदल दिया है, जिससे अब सारा पानी कॉलोनी की तरफ धकेला जा रहा है। परिणाम यह है कि जल निकासी पूरी तरह बाधित हो चुकी है और थोड़ी सी बारिश भी तबाही का रूप ले रही है।

15 मिनट की बारिश ने दिखा दी मानसून की भयावह तस्वीर

कॉलोनीवासियों का सबसे बड़ा डर आने वाला मानसून है। उनका कहना है कि अगर 15 मिनट की बारिश में यह हाल है, तो आधा घंटा या एक घंटे की बारिश में घर रहने लायक नहीं बचेंगे। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में घरों में लगातार पानी घुसने से भारी आर्थिक नुकसान होगा। बच्चों और बुजुर्गों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव घरों में घुस सकते हैं। सड़कों पर जलभराव से आवागमन ठप हो सकता है। किसी भी वक्त बड़ा हादसा या जान-माल की हानि हो सकती है। 

कॉलोनीवासियों की दो टूक चेतावनी-‘मानसून से पहले समाधान करो’

कॉलोनीवासियों ने स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि अब वे केवल सफाई नहीं, बल्कि समुचित ड्रेनेज प्लान, नालों की री-डिजाइनिंग, जल निकासी का स्थायी प्रोजेक्ट और आपात राहत व्यवस्था चाहते हैं। लोगों ने साफ कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या केवल जलभराव नहीं, बल्कि मानवीय संकट बन जाएगी।

इन कॉलोनीवासियों ने उठाई आवाज

रमेश चंद शर्मा, मुकेश चंद गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, दीपक गुप्ता, विकास तिवारी, हरी बाबू अग्रवाल, मनीष गुप्ता, अनुराग शर्मा, परिजात चतुर्वेदी, अनिल कुमार जैन, विवेक गुप्ता, अमन, अनुराग जैन, सुलभ गुप्ता, जीतू शर्मा, अन्नू जैन, चिंटू वर्मा, पंकज, पारुल चतुर्वेदी सहित अनेक कॉलोनीवासियों ने प्रशासन और नगर निगम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।