महाशिवरात्रि की भांति भक्तिमय हुआ समापन दिवस, शिव तत्व में लीन हुआ महाकालेश्वर धाम
आगरा। श्री महाकालेश्वर मंदिर, दयालबाग में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा महोत्सव का समापन गौरवपूर्ण भक्ति उल्लास के साथ हुआ। श्रद्धा, शिवत्व और सेवा भाव की त्रिवेणी ने हजारों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरोया।
-शिव महापुराण कथा के समापन पर उमड़ा आस्था का सैलाब, हनुमंत भजन में झूमे श्रद्धालु
महा रुद्राभिषेक और 121 पार्थिव शिवलिंगों से आरंभ
सुबह का शुभारंभ महा रुद्राभिषेक से हुआ। इसके बाद 121 पार्थिव शिवलिंगों का विधिपूर्वक पूजन कर भक्तों ने शिव कृपा प्राप्त की। मंदिर परिसर शिव मंत्रों की दिव्य ध्वनि से गूंज उठा।
पूर्णाहुति यज्ञ में समर्पण का भाव
पूर्णाहुति यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने आहुति अर्पित कर जीवन में शिवत्व को आत्मसात करने का संकल्प लिया। यज्ञ के माध्यम से समस्त विश्व में शांति, सद्भाव और कल्याण की कामना की गई।
विशाल भंडारा और सेवा
कथा के समापन अवसर पर आयोजित भव्य भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। महिला मंडल और युवा सेवा दल की ओर से सेवा कार्यों का संचालन सराहनीय रहा।
बागेश्वर धाम प्रतिनिधियों ने किया व्यास पूजन
बागेश्वर धाम सरकार के प्रतिनिधि रोहित मिश्रा और गुरुप्रसाद ने व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य मृदुलकांत शास्त्री का व्यास पूजन कर सम्मान किया। व्यास पूजन के साथ ही भक्ति रस में डूबे हनुमंत भजन ने वातावरण को शिवमय कर दिया।
शिव तत्व का दर्शन और संदेश
आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने कथा के अंतिम प्रवचन में शिव तत्व के सार को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिव कोई मूर्ति नहीं, वह भीतर का संतुलन, निश्चलता और करुणा हैं। शिव महापुराण आत्मा को जागृत करने का माध्यम है।
मुख्य संयोजक आचार्य सुनील वशिष्ठ ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, समाज को जोड़ने वाली आध्यात्मिक क्रांति है। मंदिर संस्थापक रामचरण शर्मा ने आयोजन को जन-कल्याण और आत्मजागरण की प्रेरणा बताया।