रसखान समाधि पर बिखरे सांझी कला के रंग, ब्रज की परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल
महावन (मथुरा)। रसखान समाधि स्थल मंगलवार को ब्रज की पारंपरिक सांझी कला के रंगों से सराबोर हो उठा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त वार्षिक आयोजन सांझी महोत्सव-2026 का विधिवत शुभारंभ हुआ। परिसर में कलाकारों ने पोर्ट्रेट सांझी, सूखे रंगों और गोबर से सांझी तैयार कर इस पारंपरिक लोककला के विविध रूपों को जीवंत किया।
महोत्सव का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय और गोकुल नगर पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद कलाकारों ने सांझी कला की विभिन्न विधाओं पर काम शुरू किया।
छात्राओं ने सजाई आकर्षक रंगोलियां
इंटरप्रिटेशन सेंटर में कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता ने कार्ष्णि बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने छात्राओं से लक्ष्य निर्धारित कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। छात्राओं ने परिसर में आकर्षक रंगोलियां बनाईं, जिससे पूरा परिसर ब्रज की लोककला के रंगों से सज उठा।
समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार और अनुपम यादव ने बताया कि 7 अक्टूबर से कला में रुचि रखने वाले बच्चों, महिलाओं और अन्य इच्छुक प्रतिभागियों को सांझी निर्माण में सहभागिता का अवसर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को ब्रज की पारंपरिक सांझी कला से जोड़ना है।
रसखान और ताज बीबी के पदों का गायन
महोत्सव के पहले दिन शाम को राघव मिश्रा बंधुओं ने रसखान और ताज बीबी के पदों के साथ सांझी के पारंपरिक पदों का संगीतमय गायन प्रस्तुत किया। सांझी कला के साथ पद गायन ने महोत्सव के वातावरण को ब्रज की लोक और भक्ति परंपरा से जोड़ दिया।
इस अवसर पर परिषद के पर्यावरण सलाहकार दिवाकर वशिष्ठ, ईको रेस्टोरेशन प्रभारी मुकेश शर्मा, राजस्व समन्वयक चंद्रिका प्रसाद राय, पूर्व राजस्व समन्वयक रामवीर सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।