यूनिवर्सिटी की आवासीय इकाई के अधीक्षक समेत चार कर्मचारियों पर एससी-एसटी एक्ट में परिवाद दर्ज

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एक अनुबंधित अनुसूचित शिक्षक के साथ जातिगत उत्पीड़न और मारपीट के कथित आरोपों पर विश्वविद्यालय की आवासीय इकाई के अधीक्षक सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ एससी-एसटी विशेष न्यायालय में परिवाद दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने शिक्षक को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया, हाथापाई की और जान से मारने की धमकी दी।

Oct 27, 2025 - 22:23
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यूनिवर्सिटी की आवासीय इकाई के अधीक्षक समेत चार कर्मचारियों पर एससी-एसटी एक्ट में परिवाद दर्ज

पर्यावरण अध्ययन विभाग में अनुबंधित रूप से कार्यरत डॉ. अनिल कुमार ने कोर्ट में दिए अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने स्थायीकरण और अनुबंध अवधि बढ़ाने के लिए कुलाधिपति को प्रार्थना पत्र भेजा था। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय प्रशासन को उसका निस्तारण करने के निर्देश दिए थे और इसके लिए एक कमेटी गठित की गई थी।

जुलाई 2024 में जब वे इस संदर्भ में आवासीय इकाई के कार्यालय अधीक्षक मधुसूदन कृष्ण से मिलने पहुंचे, तो अधीक्षक ने उनसे उनकी जाति पूछी। जब उन्होंने बताया कि वे जाटव समाज से हैं, तो अधीक्षक ने कथित रूप से कहा-  कुर्सी से खड़ा हो, तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे बराबर बैठने की!

डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो वहां मौजूद कनिष्ठ सहायक सौरव दुबे, शिवम सिंह, अमिता वर्मा सहित अन्य कर्मचारियों ने भी उनके साथ अभद्रता की।
उन्होंने बताया कि सभी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज और हाथापाई की, और धमकी दी कि अगर दोबारा ऑफिस आया तो जान से मार देंगे।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस को भी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत में गुहार लगाई। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने अधीक्षक मधुसूदन कृष्ण, सौरव दुबे, शिवम सिंह और अमिता वर्मा के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धाराओं सहित अन्य गंभीर आरोपों में परिवाद दर्ज कर लिया है। इस पूरे प्रकरण ने विश्वविद्यालय परिसर में भी हलचल मचा दी है।

SP_Singh AURGURU Editor