यादों का संगम : महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में 1992 बैच का स्नेह मिलन समारोह

आगरा। बचपन के दोस्तों की हंसी, क्लासरूम की गूंज और गुरुजनों का आशीर्वाद। महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज, धूलियागंज में शनिवार को यह नज़ारा देखने को मिला, जब गणित वर्ग बैच 1992 के छात्र-छात्राएं अपने परिवार सहित स्नेह और आशीष मिलन समारोह में जुटे। बरसों बाद विद्यालय की चौखट पर लौटे पूर्व छात्र अपने शिक्षकों को नमन करने और पुरानी यादों को ताज़ा करने पहुंचे।

Aug 30, 2025 - 20:10
 0
यादों का संगम : महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में 1992 बैच का स्नेह मिलन समारोह
धूलियागंज स्थित महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में आयोजित पूर्व छात्र स्नेह मिलन एवं आशीर्वाद समारोह में शिक्षकों के साथ उपस्थित पूर्व छात्र।

गुरुजनों का सम्मान और छात्रवृत्ति

कार्यक्रम में पूर्व छात्रों ने अपने सेवानिवृत्त शिक्षकों वाईपी गुप्ता, एके अग्रवाल, सुबोध कुमार जैन, एसके तिवारी, पूरन चंद, बीडी अग्रवाल, उमाशंकर गुप्ता और राजेश्वर अग्रवाल का शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। इसके साथ ही परंपरा को जीवित रखते हुए बैच 1992 के पूर्व छात्रों द्वारा कॉलेज के इंटरमीडिएट टॉपर को 11,000 रुपये और हाईस्कूल टॉपर को 5,100 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

पूर्व छात्रों की उपलब्धियाँ और संकल्प

बैच 1992 के छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में समाज की धुरी बने हुए हैं। सुशील कुमार जैन और चंद्रकांत शर्मा बतौर प्रधानाचार्य शिक्षा जगत को दिशा दे रहे हैं, तो ललित कुमार सिंह और विपिन जैन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रमोद चौहान चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, वहीं मनीष मित्तल, अभिनव भार्गव, संजीव गुप्ता, जुगल किशोर, शिवांकर अमोल, मनीष अग्रवाल, अनूप गोयल, विकास बंसल, विशाल बंसल, मनोज सिंह, प्रदीप शर्मा, अनिल गुप्ता और विवेक अग्रवाल उद्योग व उद्यमिता में पहचान बना चुके हैं।

समारोह के संयोजक विजय बंसल ने घोषणा की कि कॉलेज को सरकार द्वारा दी जा रही एक करोड़ रुपये की अनुदान राशि में 25 प्रतिशत सहयोग बैच 1992 के छात्र देंगे। इसके साथ ही विद्यालय के जीर्णोद्वार निर्माण कार्य में भी योगदान करने का संकल्प लिया गया।

भावुक पलों से सजा समारोह

यह मिलन समारोह एक पारिवारिक रूप में तब्दील हो गया, जहां पूर्व छात्र अपने बच्चों को पुराने क्लासरूम दिखा रहे थे और गुरुओं से मिली शिक्षा को याद कर भावुक हो रहे थे। हंसी और स्मृतियों से सजे इस मिलन में एक कसक यह भी रही कि बचपन के सुनहरे दिन लौटकर नहीं आएंगे, परंतु यादों में उन्हें बार-बार जिया जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor