शिक्षा में संवेदना का संगम: 'फील सील' ओरिएंटेशन बना बच्चों की भावनाओं की पाठशाला

आगरा। देश की शिक्षा प्रणाली में मानवीयता और भावनात्मक विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में फीलिंग माइंड्स संस्था द्वारा आयोजित 'फील सील' ओरिएंटेशन कार्यक्रम का दूसरा दिन भी अत्यंत प्रेरक और उपयोगी सिद्ध हुआ। सिकंदरा बोदला रोड स्थित विमल विहार परिसर में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भावनात्मक शिक्षा के महत्व को गहराई से जाना।

Jul 27, 2025 - 18:30
Jul 28, 2025 - 18:30
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शिक्षा में संवेदना का संगम: 'फील सील' ओरिएंटेशन बना बच्चों की भावनाओं की पाठशाला
विमल विहार, सिकंदरा बोदला रोड स्थित फीलिंग माइंड्स संस्था के कार्यालय में आयोजित फील सील ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करतीं संस्थापक डॉ. चीनू अग्रवाल।

‘फील सील’ ओरिएंटेशन का दूसरा दिन भावनात्मक शिक्षा को समर्पित, देशभर से आए शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण, बच्चों में संवेदनशीलता और मानसिक मजबूती के निर्माण पर जोर

बच्चों को गणित के साथ भावनाएं भी सिखाएं

फीलिंग माइंड्स संस्था की संस्थापक और ख्याति प्राप्त मनोचिकित्सक डॉ. चीनू अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विज्ञान, गणित और भाषा तो पढ़ाई जाती है, लेकिन बच्चों को यह नहीं सिखाया जाता कि भावनाएं क्या हैं, उन्हें कैसे पहचाना और व्यक्त किया जाए। यह अभाव उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बना देता है।

उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी के आंकड़ों के अनुसार, हर साल भारत में लगभग 1.25 लाख आत्महत्याएं होती हैं, जिनमें करीब 13,000 बच्चे शामिल होते हैं। इस भयावह स्थिति का मुख्य कारण भावनात्मक मार्गदर्शन की कमी है।

देश के हर कोने तक पहुंचेगा यह संदेश

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित शिक्षक अगले छह माह तक ऑनलाइन माध्यम से देशभर में भावनात्मक शिक्षा को फैलाने का काम करेंगे। ग्रैंड पेरेंटिंग पर आधारित विशेष सेशन भी आयोजित किए गए, जिसमें संयुक्त परिवार की भूमिका और बच्चों के अकेलेपन पर संवाद हुआ।

फील सील’ सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक परिवर्तन की शुरुआत

कार्यक्रम में शैलेश जिंदल ने ‘फील सील’ का शाब्दिक और व्यवहारिक अर्थ बताते हुए इसे केवल एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि सोशल, इमोशनल और एकेडमिक लर्निंग का संतुलित मॉडल बताया। उन्होंने इसे शिक्षा का भावनात्मक पुनर्निर्माण बताया।

गतिविधियों से सजी सीखने की यात्रा

इंटरएक्टिव सत्र, मूवी विश्लेषण और खुली चर्चा से जुड़ा हर शिक्षक
दूसरे दिन की कार्यशाला में भावनाएं कैसे व्यक्त करें, विषय पर केंद्रित कई इंटरएक्टिव सत्र आयोजित हुए। इसमें एक्टिविटी आधारित लर्निंग, मूवी वार्ता और जिज्ञासा आधारित ओपन डिस्कशन प्रमुख रूप से शामिल रहे।

बच्चों को चाहिए ज्ञान के साथ सहानुभूति

इस अवसर पर हेमा फाउंडेशन द्वारा संचालित हेम सीड्स कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई, जो सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को बढ़ावा देता है। यह देश के अनेक स्कूलों में पहले से ही प्रभावी ढंग से लागू हो चुका है।

प्रतिभागियों ने कहा- यह शिक्षा नहीं, संवेदना का अभियान है

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस पहल को शिक्षा की पारंपरिक सोच को झकझोरने वाली पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों को केवल ज्ञानी नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से जागरूक, संतुलित और खुशहाल नागरिक बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।

SP_Singh AURGURU Editor