दयालबाग में नर्सरी एंड प्ले सेंटर, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस व स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर के संयुक्त वार्षिकोत्सव में संस्कार, संस्कृति और शिक्षा का संगम

आगरा। सत्संग की पावन कर्मभूमि दयालबाग पर रविवार को शिक्षा, संस्कृति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब नर्सरी एंड प्ले सेंटर, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस एवं स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर का संयुक्त वार्षिकोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति-भाव के साथ सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम गुरु महाराज सत्संगी साहब एवं रानी साहिबा की उपस्थिति में हुआ, जहां कृषि कार्य के बीच बच्चों की प्रतिभा ने सभी को भावविभोर कर दिया।

Feb 15, 2026 - 19:21
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दयालबाग में नर्सरी एंड प्ले सेंटर, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस व स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर के संयुक्त वार्षिकोत्सव में संस्कार, संस्कृति और शिक्षा का संगम
दयालबाग में नर्सरी एंड प्ले सेंटर, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस व स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर के संयुक्त वार्षिकोत्सव के मौके की कुछ तस्वीरें।

नर्सरी एंड प्ले सेंटर की स्थापना वर्ष 1941 में बच्चों के लिए एक प्ले सेंटर के रूप में की गई थी। वर्तमान में यहाँ 3 से 5 वर्ष के नन्हे बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, शारीरिक व्यायाम और नैतिक संस्कारों का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।

स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस की स्थापना 12 मई 1965 को तेलुगू स्कूल के रूप में हुई थी। दिसंबर 1976 में इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ और अन्य भाषाओं का शिक्षण भी प्रारम्भ किया गया। आज यहाँ तमिल, तेलुगू, पंजाबी, बंगाली, उड़िया, संस्कृत, फ्रेंच एवं जर्मन, कुल आठ भाषाएं सिखाई जाती हैं। दो वर्षीय पाठ्यक्रम के उपरांत प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है। विद्यालय में छठी से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है।

स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर की स्थापना 17 सितंबर 1979 को हुई, जिसका उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और ललित कलाओं से परिचित कराते हुए उनकी प्रतिभा को निखारना है। यहां दूसरी से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी संगीत, नृत्य, ड्रामा, आर्ट एवं क्राफ्ट जैसी विधाओं का प्रशिक्षण लेते हैं। चार वर्षीय पाठ्यक्रम के बाद विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है।

कार्यक्रम में नर्सरी एंड प्ले सेंटर के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने इंग्लिश सॉन्ग “O Gracious Lord You Are So Kind” की मधुर प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस के विद्यार्थियों ने उड़िया भाषा में ऐक्शन सॉन्ग ‘आसो रे आसो कोरिबा चाषो’ प्रस्तुत कर भाषायी विविधता और सांस्कृतिक समरसता का सुंदर उदाहरण पेश किया। वहीं स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर के विद्यार्थियों ने भाव नृत्य ‘सारी सृष्टि जिससे जागी, बीज वही दिव्य वाणी’ के माध्यम से आध्यात्मिक भावनाओं को सजीव कर दिया। अंत में ‘तमन्ना’ की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन हुआ।

इस अवसर पर श्रीमती प्रीतम प्यारी, श्रीमती स्वरूप रानी और अन्य शिक्षकों ने दयालबाग की अद्वितीय शिक्षा प्रणाली और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर प्रकाश डाला। श्रीमती महाराज कुमारी (संगीत शिक्षिका) ने संगीत व कला के माध्यम से भारतीय सभ्यता और संस्कारों को जीवंत रखने की बात कही।
श्रीमती मधु बनी (नृत्य शिक्षिका) ने बताया कि बच्चे प्रतिदिन भरतनाट्यम, कथक और लोक नृत्यों का अभ्यास करते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। श्रीमती स्वामी प्यारी (प्रभारी, डी.ई.आई. नर्सरी एंड प्ले सेंटर) ने अपने 48 वर्षों के अनुभव साझा किये।

पूरे कार्यक्रम का सजीव प्रसारण ई-सत्संग केसकेड के माध्यम से देश-विदेश के 580 से अधिक केंद्रों/शाखाओं पर किया गया, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्तर पर श्रद्धालुओं और शिक्षाविदों से जुड़ सका।

SP_Singh AURGURU Editor