आगरा मेट्रो के भूमिगत भाग में अब चल रहा दो सुरंगों का निर्माण

आगरा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा महुआखेड़ा स्थित कास्टिंग यार्ड में आगरा मेट्रो के भूमिगत भाग में टनल निर्माण हेतु रिंग सेगमेन्ट्स की कास्टिंग कार्य पूरा हो गया है। इस मौक़े पर आगरा मेट्रो के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार राय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे । 

Nov 23, 2024 - 12:58
 0
आगरा मेट्रो के भूमिगत भाग में अब चल रहा दो सुरंगों का निर्माण
आगरा मेट्रो के महुआखेड़ा कास्टिंग यार्ड में रिंग सेगमेंट्स की कास्टिंग के पूर्ण होने पर पूजन करते परियोजना निदेशक अरविन्द राय।

-टनल निर्माण में प्रयोग की जाने वाली रिंग सेगमेंट्स की कास्टिंग का कार्य पूरा हो चुका

आगरा मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर में लगभग 7 किमी लंबे भूमिगत भाग में 5.8 मीटर व्यास की दो समानांतर सुरंगों का निर्माण किया जा रहा  है। भूमिगत भाग के लिए कुल 8300 रिंग हेतु सेगमेन्ट्स की कास्टिंग की पूरी हो गई है।

टनल निर्माण की प्रक्रिया में टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) द्वारा मिट्टी की कटाई के बाद टीबीएम के जरिए इन रिंग सेगमेंट्स को लगाकर टनल का निर्माण किया जाता है। प्रीकास्ट तकनीक से निर्मित रिंग के 6 अलग-अलग हिस्से मिलकर 5.8 मीटर व्यास की एक रिंग का निर्माण करेंगे। टनल रिंग के सभी सेगमेंट्स एक-दूसरे से इंटरलॉक्ड होने के साथ ही पिछली व अग्रिम रिंग के साथ इंटरलॉक्ड होंगे। इसी क्रम में टनल का निर्माण किया जाएगा।  

टनल निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले टीबीएम की लॉन्चिंग हेतु एक लॉन्चिंग शाफ्ट का निर्माण किया जाता है। इसके बाद गैन्ट्री क्रेन की मदद से टनल बोरिंग मशीन के विभिन्न हिस्सों को लॉन्चिंग शाफ्ट में उतार कर उन्हें असेम्बल किया जाता है।  इसके बाद टीबीएम के पिछले हिस्से में कास्टिंग यार्ड में प्रीकास्ट तकनीक से निर्मित टनल रिंग के हिस्सों को रखा जाता है। 

एक टीबीएम मशीन एक दिन में औसतन 10 मीटर टनल का निर्माण करती है। आगरा मेट्रो टनल की औसत गहराई लगभग 16 मीटर है, जबकि अधिकतम 20 मीटर है।    
टनल बोरिंग मशीन विभिन्न हिस्सों में विभाजित होती है। टीबीएम के सबसे अग्रिम हिस्से को कटर हैड कहा जाता है, जिसकी मदद से सुरंग की खुदाई की जाती है। आगरा मेट्रो द्वारा प्रयोग की जाने वाली टीबीएम का डायामीटर 6.6 मीटर होगा। 

कटिंग हैड में एक विशेष किस्म के केमिकल के छिड़काव की भी व्यावस्था होती है, जो कि कटिंग हेड पर लगे नॉज़ल के द्वारा मिट्टी पर छिड़का जाता है। इस केमिकल की वजह से मिट्टी कटर हैड पर नहीं चिपकती और आसानी मशीन में लगी कनवेयर बेल्ट की मदद मशीन के पिछले हिस्से में चली जाती है, जहां से ट्रॉली के जरिए मिट्टी को टनल से बाहर लाकर डम्पिंग एरिया में भेज दिया जाता है। इसके साथ ही मशीन के पिछले हिस्से में प्रीकास्ट रिंग सेगमेंट को लॉन्च करने की व्यवस्था भी होती है। 

SP_Singh AURGURU Editor