महागठबंधन के भीतर अंतर्विरोध,   असम में जेएमएम उतारेगी प्रत्याशी,   केरल में राजद ने ठोकी ताल

इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के बीच अंतर्विरोध की लकीरें गहरी होने लगी है। बिहार के बाद अब असम और केरल विधानसभा में गठबंधन में शामिल दल आमने-सामने हैं। जिसका सीधा फायदा भाजपा के मिलने की उम्मीद है।  

Apr 3, 2026 - 20:12
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महागठबंधन के भीतर अंतर्विरोध,   असम में जेएमएम उतारेगी प्रत्याशी,   केरल में राजद ने ठोकी ताल


रांची। अब ये राजद सुप्रीमो लालू यादव या फिर कांग्रेस के नायक राहुल गांधी का रसूख घटने लगा है या फिर महागठबंधन के कुंए में ही भांग घुल गया या फिर सीधे-सीधे यह कह सकते हैं कि अंतर्विरोध की लकीरें गहरी होने लगी है।

नतीजतन जिस राज्य में ड्राइविंग सीट पर महागठबंधन के पार्टी है उस विशेष राज्य यानी असम और केरल विधानसभा के चुनाव में उनकी सहयोगी पार्टियां ही उनके विरुद्ध उम्मीदवार खड़ी कर उनकी जीत के मंसूबे ध्वस्त करने लगे है। चलिए जानते हैं कि कौन किसके विरुद्व उम्मीदवार देकर मिट्टी पलीद करने में लगे हैं।

असम की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अपनी ही पार्टी के सहयोगी कांग्रेस के विरुद्ध उम्मीदवार उतार चुकी है। झामुमो ने जिस सामाजिक समीकरण के रस्ते झारखंड से बीजेपी को बाहर का रास्ता दिखाया, उसी राह पर चलकर अब असम में झामुमो कांग्रेस के विरुद्ध ही उम्मीदवार दे कर कांग्रेस को सीधे सीधे नुकसान और अपरोक्ष रूप से भाजपा को मदद कर रही है। ऐसा आकलन राजनीतिक विश्लेषण कर रहे हैं।

यह नुकसान विशेष रूप से उन 21 विधानसभा सीटों पर हो रहा है जहां झामुमो ने उम्मीदवार दिए हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि झामुमो के उम्मीदवार के खड़े रहने से मुस्लिम ईसाई और आदिवासी मतों का बंटवारा होगा। इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा। पूरे असम की बात करें तो मुस्लिम की आबादी लगभग 1.07 करोड़ है। ये मुस्लिम असम के चुनाव में भी एक बड़ी भूमिका है। यहां ईसाई की संख्या लगभग चार प्रतिशत है। इस मत का विभाजन भीं कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है।

केरल के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के साथी दल राष्ट्रीय कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हैं। हालांकि राजद ने मात्र तीन विधानसभा क्षेत्रों में ही उम्मीदवार खड़े किए हैं। पर इसमें बड़ी बात यह है कि राजद ने प्रियंका गांधी के लोकसभा क्षेत्र के एक विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार उतारा है। राजद ने कोझिकोड जिले की वडाकारा सीट से एमके भास्करन, कन्नूर जिले की कुत्थुपरंबा सीट से पीके प्रवीण और वायनाड जिले की कालपेट्टा सीट से पीके अनिल को उम्मीदवार बनाया है।

हालांकि राष्ट्रीय जनता दल के युवराज तेजस्वी यादव केरल के विधानसभा चुनाव में उतरने की एक वजह पार्टी का विस्तार बताया है पर साथ साथ यह भी कहते हैं कि मेरा मूल मकसद सेक्युलर फ्रंट को मजबूत करना है। और केरल में सेकुलर फ्रंट को मजबूत करने का काम केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट(एलडीएफ) कर रहा है। इसलिए राजद उनके साथ चुनाव लड़ रहा है। बिहार और झारखंड की बात होगी तो हम लोग कांग्रेस के साथ ही लड़ेंगे।

केरल में राष्ट्रीय जनता दल चुनाव लड़ रही है। और यह महागठबंधन के साथियों के तालमेल के साथ। राजद अपने राजनीति की मूल धारा को शक्ति प्रदान करने के लिए चुनाव लड़ रही है। केरल में एलडीएफ सत्ता में है और सबसे बड़ा सेकुलर फ्रंट भी है। राष्ट्रीय जनता दल केरल में एलडीएफ के साथ मिल कर चुनाव लड़ी है। सेक्युलर राजनीति की बिहार में राजद ड्राइविंग सीट पर है कांग्रेस। वाम दल और अन्य पार्टियां राजद के साथ गठबंधन में है। केरल में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की काफी लोकप्रियता है। केरल की जनता तेजस्वी यादव पर भी भरोसा करती है। इसलिए उस लोकप्रियता का आधार मान कर एलडीएफ नेतृत्व ने तीन सीट राजद के लिए छोड़ी है। और राजद वहां लड़ रही है। बिहार की जब बात आएगी तो कांग्रेस और वाम दल मेरे साथ रहेंगे।