मथुरा में जाट महासभा के प्रांतीय अधिवेशन पर उठा विवाद: उद्देश्य पर सवाल

आगरा/मथुरा। मथुरा के सौंख रोड स्थित होटल बीपी एमराल्ड में आज होने जा रहे अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रांतीय अधिवेशन से पहले संगठन के भीतर भारी असंतोष और सवालों की बौछार शुरू हो गई है। जाट समाज के ही एक व्हाटसएप ग्रुप पर इस अधिवेशन को लेकर गर्मागर्म बहस चल रही है।

Apr 27, 2025 - 11:56
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मथुरा में जाट महासभा के प्रांतीय अधिवेशन पर उठा विवाद: उद्देश्य पर सवाल

अधिवेशन के संबंध में अखिल भारतीय जाट महासभा की आगरा इकाई के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने जानकारी दी थी कि इसमें उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की जिला कार्यसमितियों, युवा जाट महासभा और महिला जाट महासभा के पदाधिकारियों की भागीदारी अनिवार्य होगी। साथ ही केन्द्रीय जाट आरक्षण बहाली आंदोलन के लिए ठोस रणनीति बनाने तथा सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह मौजूद रहेंगे।

विरोध के स्वर तेज

हालांकि अधिवेशन से ठीक पहले ही महासभा की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारी कुंवर शैलराज सिंह समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अधिवेशन को "तथाकथित शक्ति प्रदर्शन" करार देते हुए इसकी वैधता और उद्देश्य पर गहरे सवाल खड़े किए हैं।

महासभा में अब तक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका में रहे कुंवर शैलराज सिंह ने कहा, यह कोई वास्तविक जाट अधिवेशन नहीं है। जिनका जाट आरक्षण, मृत्यु भोज, दहेज प्रथा या नशा मुक्ति से कोई लेना-देना नहीं है, वही लोग आज कौम के नाम पर आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में आगरा में अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष प्रताप चौधरी को संगठन से निलंबित किया गया था। अब उसी पृष्ठभूमि में यह अधिवेशन शक्ति प्रदर्शन के रूप में किया जा रहा है।

स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा

जाट समाज के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि मथुरा जैसे जाट बहुल क्षेत्र में आयोजित अधिवेशन में स्थानीय प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ताओं, जैसे डॉ जितेंद्र सिंह जाट तक को आमंत्रित तक नहीं किया गया। राजीव वर्मा ने कहा, क्या सारे निर्णय पहले ही ले लिए गए हैं? यह अधिवेशन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।

भीतरी असंतोष और संगठनात्मक विफलता

कई वरिष्ठ सदस्यों ने आरोप लगाया कि संगठन अब केवल चाटुकारों और दलालों का अड्डा बन गया है, जहां आवाज उठाने वालों की उपेक्षा की जाती है। यह भी कहा गया कि अधिकतर लोग केवल राजनीतिक दलों के एजेंडे को साधने के लिए जुड़े हैं, न कि जाट समाज के वास्तविक विकास के लिए।

रामवीर सिंह तोमर ने कटाक्ष करते हुए लिखा, आज जाट समाज के सम्मेलनों में स्थानीय जमीनी कार्यकर्ताओं की कोई भागीदारी नहीं रहती। यह सब कुछ चुनिंदा लोगों तक सिमट गया है।

आंकड़ों का आईना

एडवोकेट कुंवर शैलराज सिंह के मुताबिक, मथुरा, आगरा और हाथरस-सादाबाद क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 17 लाख जाट वोटर हैं, जबकि पूरे प्रदेश में 35 लाख से अधिक जाट समुदाय के सदस्य हैं। इतने बड़े समुदाय के नाम पर हो रहे अधिवेशन में मात्र 200 लोगों की बैठने की क्षमता वाले होटल में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है।

समाज की जमीनी हकीकत पर सवाल

पोस्ट्स में यह भी चिंता जताई गई कि समाज में शिक्षा, नशा मुक्ति, फिजूलखर्ची जैसी कुरीतियों के खिलाफ अधिवेशनों का कोई असर नहीं दिखता। पंचायत व्यवस्था भी गांवों में लगभग निष्क्रिय हो चुकी है। आज गरीब जाट फिजूल खर्ची में जमीन तक गंवा देता है, और सम्पन्न वर्ग खुद को खुदा समझने लगा हैष

जाट समाज के विभिन्न लोगों ने समाज के प्रबुद्ध वर्ग से यह अपील की है कि वे निष्पक्ष रूप से विचार करें कि ऐसे आयोजनों से समाज का कितना वास्तविक भला हो रहा है। कई ने सुझाव दिया कि समाज के विकास के लिए जमीनी स्तर पर वास्तविक कार्य और पारदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है।

SP_Singh AURGURU Editor