अधिवक्ता के केस में विवि की चुप्पी पर कोर्ट सख्त, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव से मांगा जवाब

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में विधिक सलाहकार के पद से कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर हटाए जाने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और जवाब न दाखिल करने को घोर आपत्तिजनक मानते हुए राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव को 22 अगस्त तक व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

Jul 25, 2025 - 17:10
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अधिवक्ता के केस में विवि की चुप्पी पर कोर्ट सख्त, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव से मांगा जवाब

यह मामला तब शुरू हुआ जब अधिवक्ता डॉ. अरुण कुमार दीक्षित ने कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें एक फर्जी पत्र के माध्यम से 8 दिसंबर 2021 से रिटर्नशिप पर दिखाया गया, जबकि असल में उन्होंने 28 मई 2022 को रिटर्नशिप ली थी। इसके पीछे की मंशा उनका भुगतान रोकना था।

याचिका में कहा गया कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा आरोप लगाया गया कि वे मामलों की सही पैरवी नहीं करते। इस पर दीक्षित का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय को सभी मामले जितवाए और करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया, जिसका विधि विभाग में रिकॉर्ड मौजूद है।

डॉ. दीक्षित ने कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, पूर्व कुलसचिव डॉक्टर ओमप्रकाश, कुलसचिव अजय मिश्रा, प्रोफेसर राजीव वर्मा, उपकुलसचिव पवन कुमार, आईईटी निदेशक प्रो. मनु प्रताप सिंह सहित 15 से अधिक लोगों को इस षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए आरोपित किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान के एवज में 30% कमीशन मांगा गया और जब उन्होंने इनकार किया, तो उन्हें बदले की कार्रवाई के तहत हटाया गया। याचिका में दावा किया गया कि पूर्व में भी तत्कालीन कुलपति अशोक मित्तल के कार्यकाल में उनके बिल रोके गए थे, जिसकी शिकायत पर कुलाधिपति ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना पंड्या की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। उस कमेटी ने बिल रोकने को अनुचित माना था।

याचिका में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मात्र 3-4 दिन में जांच कमेटी गठित कर ली और बिना अधिवक्ता को बुलाए जांच रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिसमें उनके आरोपों को भ्रामक बताया गया। उन्होंने इसे पूर्वनियोजित षड्यंत्र करार दिया है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अधिवक्ता अरुण दीक्षित द्वारा दायर किए गये वाद पर 22 जुलाई को सभी विपक्षियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था, लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अपर मुख्य सचिव राज्यपाल से जवाब तलब किया है। अब 22 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई होगी।

SP_Singh AURGURU Editor