सृष्टि दुखदाई नहीं, दृष्टि दुख का कारण हैः गुरु शरणानन्द महाराज ने बताया दुख और आनंद का रहस्य

आगरा। कार्ष्णि आश्रम, रमणरेती के श्री श्री 1008 गुरु शरणानन्द जी महाराज ने कहा कि कहा कि भगवान की बनाई सृष्टि कभी दुख का कारण नहीं हो सकती। दुख का वास्तविक कारण हमारी दृष्टि, हमारी इच्छाएं और हमारी अपेक्षाएं हैं।

Nov 13, 2025 - 18:39
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सृष्टि दुखदाई नहीं, दृष्टि दुख का कारण हैः गुरु शरणानन्द महाराज ने बताया दुख और आनंद का रहस्य
कार्ष्णि कलाप सत्संग भवन, शालीमार एनक्लेव, कमला नगर में गुरुवार को प्रवचन देते कार्ष्णि गुरु श्री गुरुशरणानंद जी महाराज।

श्री गुरु शरणानंद जी महाराज काष्णि कलाप सत्संग भवन, शालीमार एनक्लेव, कमला नगर में गुरुवार को श्री काष्णि कलाप सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित सत्संग में प्रवचन दे रहे थे।

महाराज जी ने अपने प्रवचन की शुरुआत सृष्टि के मूल ‘बिग बैंग थ्योरी’ से करते हुए की। उन्होंने कहा, सृष्टि में दुख का कोई अस्तित्व नहीं है, क्योंकि उसके रचयिता स्वयं सच्चिदानंद, आनंदकंद भगवान हैं। जब परमात्मा आनंद स्वरूप हैं, तो उनकी सृष्टि कैसे दुखदाई हो सकती है?

महाराज जी ने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि संसार को दुखमय इसलिए कहा गया है क्योंकि मनुष्य स्वयं अपने मोह, द्वेष और आसक्ति से अपना व्यक्तिगत संसार रच लेता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार पित्त रोगी को सब कुछ कड़वा लगता है, उसी प्रकार जिसके मन में विकार हैं, उसे सृष्टि कड़वी प्रतीत होती है।

गुरु शरणानन्द जी महाराज ने कहा कि दुख बाहरी नहीं, बल्कि अंतर्मन से उत्पन्न होता है। हमारी इच्छाएं और अपेक्षाएं ही हमारे दुख का कारण हैं। यदि मनुष्य मर्यादा में जीवन जीए तो दुख का प्रवेश ही नहीं होता।
उन्होंने कहा कि दूसरों के सुख से जलने वाला व्यक्ति स्वयं अपनी तृष्णा की अग्नि में जलता है। पहले पात्र बनो, फिर हर सुख स्वयं तुम्हारे पास आएगा।

महाराज जी ने विवेक और सौंदर्य की गहराई पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चा सौंदर्य त्वचा में नहीं, बल्कि हृदय की संतुष्टि और आनंद में झलकता है। जहां प्रेम है, वहीं सौंदर्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान का हर निर्णय अपने भक्त के कल्याण के लिए होता है। जैसे मां बच्चे को स्वास्थ्य के लिए कड़वी दवा पिलाती है, वैसे ही भगवान हमारे जीवन में वही करते हैं जो दीर्घकालिक रूप से हमारे हित में होता है।

इस अवसर पर कार्ष्णि आश्रम से पधारे स्वामी शैलाशनन्द, पंडित अशोक जोशी, स्वामी दिव्यानन्द सहित संतजनों ने भी आध्यात्मिक विचार रखे।
कार्यक्रम में वीरेंद्र कुमार गर्ग, नरेंद्र गर्ग, श्री भगवान अग्रवाल, नीतेश अग्रवाल, महंत कपिल नागर, विजय कुमार गर्ग, राजेन्द्र गुप्ता, तुषार गुप्ता, राजेश्वर जी (बूरे वाले) सहित सैकड़ों भक्तों ने उपस्थित होकर ज्ञान गंगा में डुबकी लगाई और सृष्टि के सत्य स्वरूप पर मनन किया।

SP_Singh AURGURU Editor