आगरा में धार्मिक सेवा के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, एक आरोपी गिरफ्तार, दो फरार

आगरा। धार्मिक और सामाजिक सेवा का नकली मुखौटा ओढ़कर बड़े पैमाने पर आर्थिक ठगी किए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसटीएफ और एटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि एक कथित धार्मिक ट्रस्ट लंबे समय से उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में अपना ठिकाना बदलकर ठगी का खेल चला रहा था। ट्रस्ट का लगातार ठिकाना बदलना इस बात का संकेत है कि धार्मिक गतिविधियां सिर्फ एक आवरण थीं, जबकि पर्दे के पीछे साइबर फ्रॉड से आने वाले धन का मेगा नेटवर्क सक्रिय था।

Nov 21, 2025 - 12:52
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आगरा में धार्मिक सेवा के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, एक आरोपी गिरफ्तार, दो फरार
आरोपियों द्वारा बनवाए गए पोस्टर।

एसटीएफ –एटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में विशाल नेटवर्क बेनक़ाब

धार्मिक ट्रस्ट की आड़ में चल रहा था बड़ा साइबर-फाइनैंशल रैकेट

लखनऊ, देवरिया, बिहार, आगरा में बार-बार ठिकाना बदलकर चल रहा था ऑपरेशन

आगरा। धार्मिक और सामाजिक सेवा का नकली मुखौटा ओढ़कर बड़े पैमाने पर आर्थिक ठगी किए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसटीएफ और एटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि एक कथित धार्मिक ट्रस्ट लंबे समय से उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में अपना ठिकाना बदलकर ठगी का खेल चला रहा था। ट्रस्ट का लगातार ठिकाना  बदलना  इस बात का संकेत है कि धार्मिक गतिविधियां सिर्फ एक आवरण थीं, जबकि पर्दे के पीछे साइबर फ्रॉड से आने वाले धन का मेगा नेटवर्क सक्रिय था।

एसटीएफ  इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा ने बताया कि ट्रस्ट बार-बार अपने बैंक अकाउंट बदलता था, ताकि धन का वास्तविक ट्रेल खोज पाना किसी भी जांच एजेंसी के लिए चुनौती बन जाए। धार्मिक आयोजन, गरीबों की मदद और दान के नाम पर आम लोगों से छोटी-छोटी रकम ली जाती थीं। बाकायदा रसीदें तक दी जाती थीं, लेकिन असल में यह पैसा धार्मिक कार्यों में नहीं, बल्कि निजी आर्थिक लाभ और साइबर मनी मैनेजमेंट में खपाया जाता था।

धोखाधड़ी की जड़ तक पहुंची एसटीएफ 

एसटीएफ ने जांच के बाद रवि प्रकाश निवासी बहादुरपुर, देवरिया को गिरफ्तार कर लिया है। अजय उर्फ़ रूपेश निवासी सेक्टर-4, आवास विकास, बोदला, आगरा और एजाज़ निवासी पुनित अपार्टमेंट, जयपुर हाउस, आगरा फरार हो गए हैं। इन सभी पर फर्जी पहचान बनाकर बैंक खाते खोलने, दान राशि हड़पने और साइबर फंड ट्रांसफर नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप हैं।

“सरकार से पैसा आएगा” कहकर फंसाते थे लोग

शिकायतकर्ताओं ललित कुमार गर्ग और सतीश सिंघल ने बताया कि उन्हें धार्मिक सेवा के नाम पर पहले ट्रस्ट से जोड़ा गया। धीरे-धीरे अजय ने दबाव बनाना शुरू कर दिया, यहां तक कि मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आईं। आरोपी लोगों को बहकाते थे कि “सरकारी अनुदान आने वाला है” और इसी भ्रम में लोगों से आधार, पैन, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर और दस्तावेज़ ले लेते थे। अजय मदद के नाम पर ₹50,000 देकर उसे ही दबाव का हथियार बना लेता था। चेकबुक पर पहले से साइन करवाए जाते थे और खातों की पूरी कमान आरोपी अपने हाथ में ले लेते थे।

झारखंड–नोएडा साइबर नेटवर्क से ट्रस्ट अकाउंट तक

एसटीएफ  की जांच में सामने आया कि ट्रस्ट के खातों में साइबर फ्रॉड से आने वाला पैसा बड़ी मात्रा में पहुंचता था। ये रकम झारखंड और नोएडा के साइबर नेटवर्क से आती थी। फिर इसे कई फर्जी खातों में ट्रांसफर किया जाता था। अंत में पैसे को नकद में निकालकर नेटवर्क के सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। शिकायतकर्ताओं के नाम पर नए सिम कार्ड, मोबाइल बैंकिंग एक्सेस, ओटीपी  कंट्रोल और फर्जी ट्रांसफर दैनिक कार्य की तरह किए जाते थे। एक मामले में ललित के नाती की सहायता के नाम पर लगभग ₹5 लाख खर्च कराने का दबाव बनाया गया। यानी मानसिक शोषण से आर्थिक शोषण तक पूरा सिस्टम संचालित था।

छापेमारी में मिली ठगी की पूरी फैक्ट्री

एसटीएफ की कार्रवाई में बरामद सामान आरोपी नेटवर्क की गहराई को बयान करता है।  एसटीएफ ने 24 एटीएम कार्ड जिसमें एसबीआई, इंडियन बैंक, IDBI, बंधन बैंक, Ujjivan Bank आदि के शामिल हैं, कई बैंक पासबुक, 32 फर्जी प्लास्टिक कार्ड, आधार/पैन कार्ड (एकाधिक फर्जी पहचान), लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, चेकबुक, नोट्स, रसीदें, दान रजिस्टर, ₹10,000 नकद बरामद किए हैं।  यह पूरा सिस्टम बताता है कि कैसे आरोपी अलग-अलग पहचानें बनाकर भारी रकम घुमाते थे।

फरार आरोपियों की तलाश तेज

इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा ने बताया कि ट्रस्ट से जुड़े सभी बैंक खाते, दस्तावेज, सिम कार्ड और डिजिटल ट्रेल की जांच जारी है। फरार आरोपी अजय उर्फ रूपेश और एजाज़ की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि यह मामला सिर्फ धार्मिक ट्रस्ट का नहीं, बल्कि एक मल्टी-स्टेट साइबर–फाइनैंशल रैकेट का हिस्सा हो सकता है।