आगरा में साइबर ठगों का तांडव, जाल में फंसाकर 55 लाख से ज्यादा की ठगी

आगरा में साइबर ठगी के चार बड़े मामलों ने लोगों को झकझोर दिया है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल से बैंक कर्मचारी बनकर 9.66 लाख, कमला नगर निवासी से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 26 लाख, शमसाबाद निवासी से 800% मुनाफे का लालच देकर 12.31 लाख, और रिटायर्ड शिक्षिका से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 7.50 लाख रुपये ठग लिए गए। इन चारों मामलों में कुल ठगी करीब 55.47 लाख रुपये की हुई है। पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ये घटनाएं साफ करती हैं कि साइबर ठग अब भरोसा, लालच और डर—तीनों को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

Mar 26, 2026 - 15:08
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आगरा में साइबर ठगों का तांडव, जाल में फंसाकर 55 लाख से ज्यादा की ठगी
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रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल, शिक्षिका और आम नागरिक बने निशाना, कहीं क्रेडिट कार्ड सर्विस, कहीं 800% मुनाफा तो कहीं पुलिस-जांच का डर दिखाकर ठगों ने उड़ाए लाखों रुपये

आगरा। साइबर ठग अब पहले से कहीं ज्यादा शातिर और संगठित हो चुके हैं। वे हर दिन नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर, कभी ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर, तो कभी “डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। सरकार, बैंक और सुरक्षा एजेंसियों की लगातार चेतावनी के बावजूद लोग ठगों के निशाने पर आ रहे हैं। आगरा में सामने आए चार अलग-अलग मामलों ने साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब समाज के हर वर्ग—रिटायर्ड अफसर, शिक्षिका, नौकरीपेशा और आम नागरिक को निशाना बना रहे हैं। इन चार मामलों में ठगों ने मिलकर करीब 55 लाख रुपये से ज्यादा की रकम उड़ा ली। पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन ये घटनाएं हर नागरिक के लिए बड़ा अलर्ट हैं।

आगरा में साइबर ठगी के इन मामलों ने एक बार फिर लोगों की सुरक्षा और जागरूकता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों से सामने आए चार मामलों में ठगों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से लोगों को मानसिक दबाव, भरोसे और लालच के जरिए फंसाया। कहीं बैंक कर्मचारी बनकर क्रेडिट कार्ड सर्विस एक्टिवेट करने का झांसा दिया गया, कहीं ऑनलाइन ट्रेडिंग में 30 प्रतिशत से 800 प्रतिशत तक मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये ठग लिए गए, तो कहीं पुलवामा हमले से कथित कनेक्शन और फर्जी जांच एजेंसी का डर दिखाकर “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर रकम ऐंठ ली गई।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल से 9.66 लाख की ठगी

नालंदा टाउन, शमसाबाद मार्ग निवासी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अवनीशपाल सिंह साइबर ठगों के झांसे में आ गए। बताया गया है कि 16 मार्च को उनके पास एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को आईसीआईसीआई बैंक का कर्मचारी बताया। उसने क्रेडिट कार्ड की सर्विस एक्टिवेट करने का झांसा दिया। बातचीत के बाद ठगों ने उनके क्रेडिट कार्ड से पांच फर्जी ट्रांजेक्शन कर डाले।
क्रेडिट कार्ड की 10 लाख रुपये की लिमिट में से 9.66 लाख रुपये निकाल लिए गए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया और संदिग्ध कॉलर का नंबर भी पुलिस को उपलब्ध कराया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग में 30% मुनाफे का लालच, 26 लाख साफ

आगरा के कमला नगर स्थित कर्मयोगी एन्क्लेव निवासी अनुराग गौतम को साइबर ठगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर निशाना बनाया। ठगों ने उन्हें 30 प्रतिशत मुनाफे का झांसा दिया और निवेश के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए फर्जी तरीके से लाभ का भ्रम पैदा किया गया, जिसके बाद अनुराग गौतम ने बड़ी रकम निवेश कर दी।
कुछ ही समय में ठगों ने उनके 26 लाख रुपये हड़प लिए। जब रकम वापस नहीं मिली और संदेह गहराया, तब पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

800% मुनाफे के नाम पर 12.31 लाख की ठगी

शमसाबाद क्षेत्र के पुरा सूरजमल निवासी रामनाथ सिंह को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसाया। ठगों ने उन्हें 800 प्रतिशत मुनाफे का लालच दिया और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक खाता खुलवाया। इसके बाद उनसे अलग-अलग किश्तों में रकम जमा कराई गई।
जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक उनके 12.31 लाख रुपये ठगों के कब्जे में जा चुके थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ठगों के डिजिटल नेटवर्क को खंगाल रही है।

डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड शिक्षिका से 7.50 लाख की ठगी

आगरा में एक रिटायर्ड शिक्षिका को साइबर ठगों ने बेहद डरावने और मानसिक दबाव वाले तरीके से शिकार बनाया। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा बताकर महिला को कहा कि उनका नाम पुलवामा हमले से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद उन्हें लगातार 10 दिन तक मानसिक दबाव में रखा गया।
वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी और जांच जैसी फर्जी सेटिंग दिखाकर उन्हें भरोसे में लिया गया और “डिजिटल अरेस्ट” जैसा माहौल बनाकर डराया गया। ठगों ने महिला से 7.50 लाख रुपये अलग-अलग माध्यमों से जमा करा लिए, जिनमें चेक के जरिए खातों में रकम जमा कराना भी शामिल था। बाद में जब महिला साइबर सेल पहुंचीं, तब पूरी ठगी का खुलासा हुआ। उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी है।

साइबर अपराधी अब सिर्फ तकनीकी ठगी नहीं कर रहे, बल्कि वे लोगों को सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नियंत्रित कर रहे हैं। वे फर्जी कॉल, व्हाट्सएप ग्रुप, नकली ऐप, वीडियो कॉल, बैंकिंग बहाने और सरकारी एजेंसी की नकल जैसे हथकंडे अपनाकर शिकार को इतना भ्रमित कर देते हैं कि वह खुद ही अपनी रकम उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर देता है।

पुलिस और आम लोगों के लिए बड़ा अलर्ट

आगरा में सामने आए ये मामले साफ संकेत दे रहे हैं कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन जब तक आम लोग सतर्क नहीं होंगे, तब तक ऐसे अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।

याद रखें 

कोई भी बैंक फोन पर ओटीपी, सीवीवी कार्ड डिटेल या स्क्रीन शेयर नहीं मांगता।
“30%, 100%, 800% मुनाफा” जैसे ऑफर लगभग हमेशा ठगी का संकेत होते हैं।
कोई भी सरकारी एजेंसी “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।
वीडियो कॉल पर पुलिस वर्दी दिखना असली जांच का प्रमाण नहीं है।
अनजान लिंक, ऐप, निवेश ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से तुरंत दूरी बनाएं।