आगरा में 2025 में साइबर क्राइम ग्राफ हाई, 29.55 करोड़ की ठगी, 759 लोग बने शिकार
वर्ष 2025 में आगरा में साइबर ठगी के 759 मामले सामने आए, जिनमें कुल 29.55 करोड़ रुपये की ठगी हुई। हर महीने औसतन 2.46 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी दर्ज की गई। 70% मामलों में हाई रिटर्न निवेश का लालच और 20% मामलों में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लोगों को ठगा गया। साइबर पुलिस ने 5.66 करोड़ रुपये वापस कराए, 104 ठगों को गिरफ्तार किया और हजारों मोबाइल नंबर व IMEI ब्लॉक किए।
लालच और डर साइबर ठगों के सबसे बड़े हथियार, 70% मामलों में हाई रिटर्न का झांसा
आगरा। आगरा में वर्ष 2025 के दौरान साइबर अपराधों ने चिंताजनक रूप ले लिया। पूरे साल में 759 लोग साइबर ठगी के शिकार बने और कुल 29.55 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई। आंकड़ों के अनुसार हर महीने औसतन 2.46 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी दर्ज की गई। साइबर पुलिस के अनुसार ठगों ने लोगों की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों, तेजी से पैसा कमाने की लालच और कानूनी कार्रवाई का डर का सबसे ज्यादा फायदा उठाया। जांच में सामने आया है कि लगभग 70% मामलों में ठगों ने शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, सोना या ऑनलाइन ट्रेडिंग में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठगा।
साइबर ठगों ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट, व्हाट्सएप/टेलीग्राम ग्रुप में “इनसाइडर टिप्स”, शुरुआती छोटे रिटर्न देकर भरोसा जीतना और फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर संपर्क तोड़ देना की रणनीति अपनाते हुए लोगों को अपने जाल में फंसाया। पढ़े-लिखे और पेशेवर लोग भी उनके इस जाल में फंसे, जिससे साफ है कि साइबर अपराधी बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट का डर
करीब 20% मामलों में ठगों ने खुद को पुलिस, सीबीआई, कस्टम अधिकारी या बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया। इसके तहत साइबर ठग वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी पहनकर लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग या आधार लिंक मामले में फंसाने की धमकी देते हुए तुरंत खाते से रकम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाते हैं। इसी के चलते डर के माहौल में लोग सत्यापन किए बिना ही अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठे।
शिक्षित और जागरूक लोग भी निशाने पर
साइबर पुलिस का कहना है कि अब ठग सिर्फ कम पढ़े-लिखे लोगों को नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारियों को भी निशाना बना रहे हैं। ठगी के मामलों में तकनीकी समझ रखने वाले लोग भी फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग ऐप और ओटीपी शेयर करने जैसी गलतियों के कारण शिकार हुए।
साइबर पुलिस की कार्रवाई
साइबर पुलिस ने कई मामलों मे तत्परता दिखाते हुए 5.66 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस कराए। इसी के साथ बीते वर्ष में साइबर पुलिस ने 104 साइबर ठग गिरफ्तार भी किए। साइबर पुलिस ने 7742 मोबाइल IMEI नंबर, 1928 मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए। साइबर सेल ने बैंक खातों को फ्रीज करने, संदिग्ध लेनदेन रोकने और त्वरित शिकायत पंजीकरण के जरिए नुकसान कम करने का प्रयास किया।
ऐसे बचें साइबर ठगी से
अत्यधिक रिटर्न का दावा करने वाले निवेश से बचें
अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड न करें
ओटीपी, सीवीवी, पिन किसी से साझा न करें
किसी भी “डिजिटल अरेस्ट” कॉल की तुरंत स्थानीय पुलिस से पुष्टि करें
1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत दर्ज करें