84 दिन बाद नरक से लौटी बेटी पिता को सौंपी, बोली– पापा अब मुझे कभी मत छोड़ना
आगरा। एक बेटी जब 84 दिन बाद पिता के पास लौटी तो उसका कलेजा रो पड़ा। उसे गले लगाकर पिता की आंखें भी भर आईं। जगदीशपुरा क्षेत्र की 16 वर्षीय किशोरी, जिसे मानव तस्करों ने 3.70 लाख रुपये में बेच दिया था, मंगलवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेशी के बाद परिजनों को सौंप दी गई। इस दौरान उसकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे। वह सिर्फ एक ही बात कह रही थी—पापा, उन्होंने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, अब मुझे कभी मत छोड़ना।
29 जनवरी: जब शुरू हुआ नरक का सफर
किशोरी को एक महिला बहला-फुसलाकर घर से ले गई। उसने आधार कार्ड में नाम और उम्र बदलकर उसे बालिग दिखाया और सिकंदरा के एक होटल में चार लोगों को 3.70 लाख रुपये में सौंप दिया। यहीं से शुरू हुआ उसका कष्टों भरा सफर। चारों आरोपी उसे कोटा ले गए। वहां एक युवक ने जबरन मंदिर में शादी का नाटक किया और फिर उसके साथ लगातार शारीरिक शोषण करता रहा। उसे घर के कामों में भी झोंक दिया गया।
कैथून थाने पहुंचकर मांगी मदद
कई दिनों तक बंधक जैसी स्थिति में रहने के बाद किशोरी को एक दिन मौका मिला और वह कैथून थाने जा पहुंची। उसने पुलिस को सारी आपबीती बताई। पुलिस ने आरोपी युवक को पकड़ लिया लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया। किशोरी को कोटा के बालिका गृह में रखा गया। वहां उसकी काउंसलिंग शुरू हुई।
14 फरवरी: पिता पहुंचे बेटी को लेने लेकिन....
कोटा बाल कल्याण समिति से सूचना मिलने पर किशोरी के पिता आगरा पुलिस के साथ वहां पहुंचे। मगर अफसरों की उदासीनता और प्रक्रिया के नाम पर उन्हें बेटी को सौंपा नहीं गया। वे कई बार कोटा गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेस बने देवदूत
इस बीच परिजनों ने चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस से मदद मांगी। नरेश ने कोटा में बाल कल्याण समिति, पुलिस और कोर्ट को पत्र लिखकर किशोरी को परिजनों को सौंपने की मांग की। उनकी कोशिशों का असर हुआ और मंगलवार को किशोरी को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।
समिति के सदस्य निमेष बेताल सिंह, हेमा कुलश्रेष्ठ और अर्चना उपाध्याय की उपस्थिति में उपनिरीक्षक देवी शरण सिंह किशोरी को लेकर पहुंचे। मेडिकल जांच कराई गई, फिर न्यायालय में बयान दर्ज कराए गए। किशोरी ने अपने बयान में पूरी सच्चाई उगली।
बोली – पापा, उन्हें सजा दिलवाओ
किशोरी बार-बार पिता से कह रही थी – पापा, मुझे फिर वहां मत भेजना। मुझे छोड़ना मत। जिन्होंने मेरे साथ ये किया, उन्हें सजा दिलवाना।
मानव तस्करी गिरोह के खिलाफ कार्रवाई जरूरी
नरेश पारस ने कहा – यह एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह है, जो भोली-भाली लड़कियों को बहला-फुसलाकर बेच देता है। इस गिरोह के पीछे बड़ी साजिश है। इसकी जांच मानव तस्करी निरोधक इकाई को सौंपनी चाहिए। मानव तस्करी निरोधक इकाई प्रभारी हेमलता ने किशोरी के माता-पिता के बयान दर्ज कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि अब मामले में मानव तस्करी, पोक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा बढ़ाया जाएगा।
वे सवाल जिनके जवाब मिलने बाकी हैं
यह मामला सिर्फ एक बच्ची का नहीं है। यह घटना एक बार फिर मानव तस्करी के खतरनाक जाल को उजागर करती है। जहां पैसे के लिए लड़कियों की बोली लगती है, और इंसानियत शर्मसार होती है। इसके साथ ही कुछ सवालों के जवाब मिलने भी बाकी हैं। आखिर कैसे एक नाबालिग को आधार कार्ड में बालिग दिखा दिया गया?होटल संचालक पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आरोपी पुलिस गिरफ्त में आने के बाद छोड़ क्यों दिए गए? क्या सिस्टम की लापरवाही एक और बच्ची की जिंदगी लील लेती?