1965–1971 युद्धों के नायक और मरुस्थल में हरियाली के सूत्रधार लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर सिंह राठौड़ का निधन,दस्यु छविराम के गैंग से अकेले ही मुकाबला कर पैतृक गांव सरौठ की रक्षा की थी

आगरा। 1965 एवं 1971 के युद्धों में अदम्य साहस दिखाने वाले और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में निर्णायक भूमिका निभाने वाले तथा रेगिस्तान में हरियाली की मिसाल कायम करने वाले भारतीय सेना के वीर योद्धा लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर सिंह राठौड़ का आज प्रातः देहावसान हो गया। उनके निधन से देश ने एक ऐसे सैनिक को खो दिया है, जिसने युद्धभूमि से लेकर समाज और पर्यावरण तक, हर मोर्चे पर असाधारण योगदान दिया।

Dec 17, 2025 - 13:50
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1965–1971 युद्धों के नायक और मरुस्थल में हरियाली के सूत्रधार लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर सिंह राठौड़ का निधन,दस्यु छविराम के गैंग से अकेले ही मुकाबला कर पैतृक गांव सरौठ की रक्षा की थी
लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर सिंह राठौर।

एटा से युद्धभूमि तक शौर्य की यात्रा

कर्नल राठौड़ का जन्म उत्तर प्रदेश के एटा जनपद के सरौठ गांव में हुआ। देशसेवा के संकल्प के साथ उन्होंने सेना में रहते हुए 1965 और 1971 के भारत–पाक युद्धों में वीरता का परिचय दिया। 1971 के युद्ध में वे बांग्लादेश की शेख मुजीबुर्रहमान की मुक्तिवाहिनी के प्रशिक्षक रहे और बांग्लादेश को आज़ादी दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।

पोखरण में हरियाली, रेगिस्तान में हरित क्रांति

सेना में तैनाती के दौरान पोखरण कैंटोनमेंट में उन्होंने चार हज़ार से अधिक वृक्ष लगाकर मरुस्थल को हरियाली की दिशा दी। उनकी इस उपलब्धि से प्रभावित होकर भारत सरकार ने रेगिस्तानी क्षेत्रों में वृक्षारोपण का व्यापक संकल्प लिया। आज पोखरण कैंट की सड़कों के किनारे खड़े विशाल वृक्ष उन्हीं की दूरदृष्टि और परिश्रम की जीवंत पहचान हैं। इसी कारण उन्हें मरुस्थल में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।

अकेले डटे रहे और डकैतों से गांव की रक्षा की

1981 में अपने पैतृक गांव सरौठ में छुट्टी के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आतंक का पर्याय रहे दस्यु छविराम और उसके गिरोह का अकेले सामना किया। उनकी बहादुरी से गांव की जान-माल की रक्षा हुई। इस अद्वितीय साहस के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उन्हें सम्मानित किया।

राजनीति और समाजसेवा में भी सक्रिय रहे

देशसेवा के साथ सामाजिक दायित्व निभाते हुए वे भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के आग्रह पर वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अलीगंज से उम्मीदवार भी रहे। वे अपने विचारों और कर्मों से युवाओं के लिए प्रेरणा बने रहे।

भरा-पूरा परिवार छोड़ा, आज ही अंतिम विदाई

लेफ्टिनेंट कर्नल राठौड़ अपने पीछे एक पुत्र, तीन पुत्रियों और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे आठ विश्व रिकॉर्ड धारक और पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन डॉ. कुंवर जय पाल सिंह चौहान के ससुर थे।
उनका अंतिम संस्कार आज सायं 4 बजे पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ ताजगंज श्मशान घाट में होगा। शवयात्रा उनके निवास, फ्लैट नं. 110, ग्रैंड फोर्ट सोसायटी, सेंट फ्रांसिस स्कूल के सामने, पश्चिम पुरी, सिकंदरा—से राष्ट्रीय ध्वज में लिपटी पार्थिव देह के साथ प्रस्थान करेगी।

SP_Singh AURGURU Editor