आगरा में डीईआई का ओपन डेः शिक्षा, संस्कार और नवाचार का विराट उत्सव, 25 हजार से अधिक लोगों ने देखी समग्र शिक्षा की जीवंत झलक

आगरा। समग्र, मूल्य-आधारित और जीवनोपयोगी शिक्षा की अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) एक बार फिर शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ता नजर आया। 31 जनवरी को डीईआई ने अत्यंत उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ अपना संस्थापक/स्थापना दिवस मनाया। यह अवसर इसलिए भी अत्यंत गरिमामय रहा क्योंकि यह संस्थान के संस्थापक निदेशक और गुरु हुजूर प्रो. डॉ. एम. बी. लाल साहब की पावन जयंती के साथ मनाया गया। पूरा परिसर शिक्षा, अध्यात्म, नवाचार और सेवा भाव के रंगों में सराबोर दिखाई दिया।

Jan 31, 2026 - 19:26
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आगरा में डीईआई का ओपन डेः शिक्षा, संस्कार और नवाचार का विराट उत्सव, 25 हजार से अधिक लोगों ने देखी समग्र शिक्षा की जीवंत झलक
दयालबाग शिक्षण संस्थान के शनिवार को आयोजित ओपन डे समारोह की कुछ झलकियां।

ओपन डे में शरीक गुरु महाराज प्रो. प्रेम सरन सतसंगी और रानी साहिबा।

1917 में राधास्वामी शिक्षण संस्थान की स्थापना के साथ अस्तित्व में आए डीईआई की नींव लखनऊ विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. एम. बी. लाल साहब की दूरदर्शी सोच और अभिनव शैक्षिक दर्शन पर आधारित है। उनकी 1975 की अग्रगामी शिक्षा नीति ने संस्थान में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की नींव रखी, जिसमें बौद्धिक उन्नयन के साथ-साथ नैतिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास को भी समान महत्व दिया गया। दशकों की निरंतर प्रगति के साथ डीईआई ने अपने विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाने के लक्ष्य को मजबूती से आगे बढ़ाया है।

संस्थापक/स्थापना दिवस समारोह, जिसे ओपन डे के रूप में जाना जाता है, में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्यों, उपलब्धियों और पहलों का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ। पूरा परिसर प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गतिविधियों और रंग-बिरंगी सजावट से जीवंत हो उठा। लगभग 25,000 लोगों ने डीईआई परिसर का भ्रमण किया और शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, कृषि, स्वास्थ्य और संस्कृति से जुड़ी विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सुबह से दोपहर तक परिसर में भक्ति संगीत गूंजता रहा, जिससे वातावरण में आध्यात्मिकता और दिव्यता का संचार हुआ।

इस वर्ष विद्यार्थियों की लगन, समर्पण और रचनात्मकता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों ने अपने नवाचारी प्रोजेक्ट्स और शोध कार्यों को ग्राफिकल चार्ट्स, वर्किंग मॉडल्स, डिस्प्ले बोर्ड्स और इंटरएक्टिव गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। संकाय स्तर और केंद्रीय स्थलों पर सुव्यवस्थित ढंग से लगाए गए स्टॉल्स ने आगरा सहित अन्य जिलों से आए आगंतुकों को DEI की शैक्षणिक दृष्टि और नवीन पहलों से रूबरू कराया। उत्तर प्रदेश के लगभग 10 स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भी परिसर का भ्रमण कर भविष्य की शैक्षिक संभावनाओं को समझा।

इस अवसर पर संस्थान के एक दर्जन से अधिक स्थानों पर कुल 51–52 स्टॉल लगाए गए, जिनमें वस्त्र, सिरेमिक एवं मिट्टी कला, जैविक खेती, कृषि एवं ग्रीनहाउस तकनीक, पेटेंट एवं प्लेसमेंट, अनुसंधान एवं नवाचार, डेयरी तकनीक, 3D प्रिंटिंग, नैनो और क्वांटम विज्ञान, चेतना अध्ययन, ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम, लेदर टेक्नोलॉजी, अनुपम उपवन, उन्नत भारत अभियान, एलुमनी नेटवर्क, कौशल विकास, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल कैंप, DEI की शिक्षा नीति, संस्थान का इतिहास, केंद्रीय प्रशासन, प्रवेश एवं परीक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों की व्यापक प्रस्तुति की गई।

युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए आयुष संकाय द्वारा विशेष ओपीडी की व्यवस्था की गई। वहीं शिक्षा संकाय ने इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) की शुरुआत कर शिक्षक शिक्षा में नए युग की पहल को रेखांकित किया। इसके साथ ही छात्र स्टार्ट-अप्स ने अपने नवाचारों और व्यावहारिक उत्पादों का प्रदर्शन कर DEI में विकसित हो रही उद्यमशीलता और कौशल-आधारित शिक्षा की मजबूत संस्कृति को सामने रखा।

विज्ञान संकाय के वनस्पति विभाग के बोटैनिकल गार्डन में तैयार की जा रही स्पिरुलीना शैवाल लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। 200 लीटर के टैंक में विकसित यह सुपर फूड 65 से 75 प्रतिशत प्रोटीन, उच्च मिनरल और आयरन युक्त होने के साथ एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है। इसके अतिरिक्त बोटैनिकल गार्डन में 151 वन-औषधियों का संरक्षण और संवर्धन किया गया है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस गरिमामय अवसर पर समारोह की शोभा गुरु महराज प्रो. पी. एस. सत्संगी साहब, अध्यक्ष, शिक्षा सलाहकार समिति, तथा रानी साहिबा की गरिमामयी उपस्थिति से और भी बढ़ गई। प्रो. सत्संगी साहब ने कृषि-सह-परिशुद्धता खेती प्रक्षेत्र में आयोजित शिक्षा सलाहकार समिति की बैठक में भाग लिया और बाद में परिसर का विस्तृत भ्रमण कर विभिन्न गतिविधियों व प्रदर्शनों में गहरी रुचि दिखाई। उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद संस्थापक दिवस समारोह को गहन आध्यात्मिक और वैचारिक ऊंचाई प्रदान करता रहा। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन समेत सभी शिक्षकगण भी इस दौरान मौजूद रहे। 

कुल मिलाकर डीईआई का संस्थापक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि शिक्षा, नवाचार, सेवा और संस्कारों की उस परंपरा का जीवंत प्रमाण है, जो आने वाली पीढ़ियों को समग्र विकास की दिशा में प्रेरित करती रहेगी।

SP_Singh AURGURU Editor