घना कोहरा छंटेगा, नववर्ष उजास से आएगाः आगरा में माधुर्य संस्था ने काव्य रसधार से किया नए साल का आत्मीय स्वागत
आगरा। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था माधुर्य द्वारा दयालबाग स्थित कार्यालय पर काव्य रसधार के माध्यम से नववर्ष स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक गोष्ठी में शहर के नए-पुराने कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण और संवेदनशील रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पूरा वातावरण काव्य, गीत, ग़ज़ल और लोकधुनों की मिठास से सराबोर रहा।
कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति के रूप में माधुर्य की संस्थापक-अध्यक्ष निशि राज ने जब अपना प्रेरक गीत—
“घना कोहरा जो छाया है, छंटेगा एक दिन ए दोस्त…
कि इस कोहरे के पीछे हैं प्रकाशित सूर्य कितने ही…”
प्रस्तुत किया, तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
गीतकार कुमार ललित की रचना—
“प्रिय तुम्हारे दर्शनों को हम तरसते रह गए,
तुम कहाँ जाने कहाँ जाने बरसते रह गए…”
पर श्रोताओं ने मुक्त कंठ से वाह-वाह की।
डॉ. केशव शर्मा ने बचपन की स्मृतियों को उकेरते हुए सुनाया—
“छोटी सखियाँ खेलीं जो संग, बचपन छूट गया…”
डॉ. राजेंद्र मिलन ने नववर्ष को संदेशवाहक बताते हुए कहा—
“लेकर आया नया संदेश जीवन का उत्कर्ष,
उथल-पुथल के गलियारों से गुजर गया गतवर्ष…”
लोकगीतों की रसधार में रमा वर्मा श्याम ने “काम ही करवाए ले दऊँ, नौकरी छोड़…” सुनाया, जबकि कांची सिंघल ‘ओस’ की ग़ज़ल—“दूर जाने की बात करते हो, दिल जलाने की बात करते हो…” ने समां बाँध दिया।
ब्रज भाषा के गीतकार ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने
“द्वार की देहरी पर खड़ी तुम प्रिये…”
सुनाकर श्रोताओं को ब्रज संस्कृति से जोड़ा।
यशोयश ने भक्ति रस में डुबोते हुए—
“श्याम सलोना साँवरो, नीकौ लागे बावरो…” प्रस्तुत किया।
श्रुति सिन्हा ने मधुर शब्दों में नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। महेश शर्मा गोपाली ने श्याम का आह्वान किया, सुधा वर्मा की प्रेरक कविता ने सकारात्मक ऊर्जा भरी, जबकि राम अवतार एवं डॉ. शशि गुप्ता के लोकगीतों ने श्रोताओं का मन जीत लिया।
इसके अतिरिक्त आदर्श नंदन गुप्त, इंदल सिंह इंदु, रामेंद्र शर्मा, आचार्य उमाशंकर, दीपक श्रीवास्तव एवं नन्द नंदन गर्ग की रचनाओं को भी भरपूर सराहना मिली। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार की काव्य गोष्ठियां राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक एकता को सशक्त करती हैं।