आगरा जेल में ‘मशक्कत’ के नाम पर मनमानी उगाही के बारे में सुनकर डिप्टी सीएम केशव मौर्य भी रह गए हैरान, मामला जल्द सीएम योगी तक पहुंचेगा
आगरा। आगरा जिला जेल में ‘मशक्कत काटने’ के नाम पर चल रही कथित खुली लूट का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी स्तब्ध रह गए थे। भाजपा के एक विधायक और संगठन के एक पदाधिकारी द्वारा बैठक में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद डिप्टी सीएम ने कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। जनप्रतिनिधि जल्द ही यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी संज्ञान में लाने जा रहे हैं।
विगत दिवस आगरा दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के समक्ष भाजपा के एक विधायक ने यह गंभीर आरोप लगाए थे कि आगरा की जिला जेल में ‘मशक्कत काटने’ के नाम पर अवैध वसूली का बड़ा खेल चल रहा है। विधायक ने बताया कि जेल प्रशासन द्वारा इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर बंदियों से भारी रकम वसूली जा रही है। भाजपा संगठन के एक पदाधिकारी ने भी विधायक की इस बात का समर्थन किया था।
बता दें कि मशक्कत का अर्थ उन कैदियों से है, जिन्हें सजा हो चुकी हो और जिन्हें जेल के भीतर श्रम कार्य कराया जाना विधिसम्मत प्रावधान है। इसके विपरीत, जिन बंदियों को केवल गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और जिन्हें जमानत पर रिहा होना होता है, उन पर मशक्कत लागू नहीं होती। बावजूद इसके, आगरा जेल में ऐसे बंदियों पर भी जबरन मशक्कत थोप दी जा रही है।
असल में यह कथित रूप से अवैध वसूली का जरिया बन चुका है। जेल के अंदर यह संदेश साफ होता है कि अगर बंदी पैसा देगा तो उससे काम नहीं कराया जाएगा। जिन पर मशक्कत का नियम लागू नहीं होना चाहिए, उनसे भी इसी नाम पर धन उगाही की जा रही है। बहुत से बंदी ऐसे होते हैं कि मशक्कत कटवाने के लिए पैसा नहीं दे पाते, उनसे काम कराने तक मामला सीमित नहीं रहता, उनकी जेल के अंदर पिटाई और अन्य तरीकों से उत्पीड़न आम होता है। इसी वजह से जेल जाने वाला हर बंदी अपनी मशक्कत कटवाने के लिए जेब ढीली करने को मजबूर हो जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, पहले मशक्कत काटने के लिए एक से पांच रुपये में काम निपट जाया करता था, लेकिन अब स्थिति यह है कि आम बंदी से भी कम से कम एक लाख रुपये की डिमांड की जाती है। यदि बंदी की आर्थिक स्थिति बेहतर मानी जाती है तो यह रकम दो लाख से बढ़कर दस लाख रुपये तक पहुंच जाती है। कुछ मामलों में बीस लाख रुपये तक की वसूली किए जाने की बात भी सामने आई है।
बैठक में मौजूद भाजपा के एक विधायक और एक पदाधिकारी ने डिप्टी सीएम को बताया कि यह जानकारी उन लोगों के हवाले से दी जा रही है, जो जेल में अपनी ‘जेब कटवाकर’ बाहर आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जेल के भीतर जाति और सरनेम के आधार पर भी ‘रेट’ तय की जाती है। यदि किसी बंदी के नाम के साथ अग्रवाल, जैन या गुप्ता जुड़ा होता है तो यह मान लिया जाता है कि वह व्यापारी वर्ग से है और उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी होगी, ऐसे में मशक्कत काटने की रकम सीधे लाखों में पहुंच जाती है।
जेल की चारदीवारी के भीतर चल रही इस कथित खुली लूट की जानकारी फिलहाल डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में लाने की भी तैयारी की जा रही है।
दरअसल इस पूरे मामले से जनप्रतिनिधि और भाजपा नेता खासे परेशान हैं। गिरफ्तारी के बाद जेल जाने वाले लोग सत्ता पक्ष के नेताओं से संपर्क कर जेल में उत्पीड़न न होने की गुहार लगाते हैं। जेल से बाहर आने के बाद यही लोग अंदर की हकीकत भाजपा नेताओं को बताते हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या सख्त कदम उठाती है और आगरा जेल में चल रही इस कथित लूट पर कब लगाम लगती है।