बल्केश्वर महादेव मंदिर में श्रीराम जन्मोत्सव की कथा से भक्त भाव विभोर
आगरा। बल्केश्वर महादेव मंदिर पर इन दिनों श्रीराम भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है। श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास राजन जी महाराज ने श्रीराम जन्म का प्रसंग सुनाया तो भक्त भाव विभोर हो उठे।
कथा व्यास ने कहा कि राजा दशरथ अपने पुत्रों के जन्म की सूचना सुनकर परम आनंद में समा गए। उनके मन में अतिशय प्रेम उत्पन्न हो गया। शरीर पुलकित हो गया। वे सोचने लगे कि जिनका नाम सुनने से ही कल्याण होता है, वही प्रभु मेरे घर आए हैं। वहीं अयोध्या में खुशियां मनाई जाने लगीं। ध्वजा, पताका और तोरणों से नगर छा गया।
कथा व्यास ने कहा कि जिस प्रकार से अयोध्या को सजाया गया, उसका तो वर्णन ही नहीं हो सकता। आकाश से फूलों की वर्षा हो रही है, सब लोग ब्रह्मानंद में मग्न हैं। महिलाएं स्वर्ण कलश लेकर और थालों में मंगल द्रव्य भरकर गाती हुई राजद्वार में प्रवेश करती हैं। महर्षि वशिष्ठ ने महाराज के पुत्रों का नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा।
राजन जी महाराज ने कहा कि जीवन में संतुष्ट होना जरूरी है। मन में भक्ति भाव के साथ कार्य करते रहिए, लेकिन जीवन में शांति जरूरी है। अगर जीवन में शांति नहीं तो अरबों रुपया होना भी बेकार है।
उन्होंने कहा कि वटवृक्ष विश्वास का प्रतीक होता है। भगवान शंकर इसी वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजन,ध्यान करते थे। वट वृक्ष के नीचे भजन करेंगे तो विश्वास बढ़ेगा।
राजन जी महाराज ने कहा कि कई लोगों के घरों में शिला पर बैठे भगवान शंकर का चिलम पीते हुए फोटो लगा रहता है। भगवान राम के नाम से पूरा दिन व्यतीत करने वाले शंकरजी को चिलम पीने का समय ही कहां मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे चित्रों को नहीं लगाना चाहिए। जो चित्रकार है, उसके चित्त में जैसा विकार होगा वैसा ही चित्र बनाएगा। जिसके हृदय में कलुषित विचार होते हैं और उनकी भावनाएं वैसी ही चित्रित होती है, इसलिए प्रेरणाप्रद चित्र अपने घरों में लगाएं।
कथा मे पदम् अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, मंजू मिश्रा, राजेश पाठक, रजनी गुप्ता, अविनाश मिश्रा, ऋषि अग्रवाल आदि मौजूद रहै। कथा में शनिवार को श्रीराम की बाल लीला का प्रसंग राजन जी महाराज द्वारा सुनाया जाएगा।