कॉल काटकर बचीं, फिर भी खाते से उड़ गए 22.88 लाख, 80 वर्षीय अधिवक्ता से साइबर ठगी

आगरा के रकाबगंज में 80 वर्षीय महिला अधिवक्ता से 22.88 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का कर्मचारी बताकर 12 रुपये जमा कराने के नाम पर फोन किया था। महिला को शक हुआ और उन्होंने कॉल काट दी। अगले दिन उन्होंने बचत खाते की 22.88 लाख रुपये की रकम एफडी करा दी, लेकिन 2 अक्टूबर को एफडी तुड़वाकर पूरी रकम ट्रांसफर कर दी गई। बैंक मैसेज से ठगी का पता चला। साइबर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

Oct 8, 2026 - 23:06
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कॉल काटकर बचीं, फिर भी खाते से उड़ गए 22.88 लाख, 80 वर्षीय अधिवक्ता से साइबर ठगी

ग्रीन गैस सब्सिडी के नाम पर 12 रुपये जमा कराने का झांसा, दो दिन बाद ही टूटी एफडी और खाते से रकम ट्रांसफर

आगरा। साइबर ठगों ने अब गैस सब्सिडी के नाम पर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रकाबगंज क्षेत्र में 80 वर्षीय महिला अधिवक्ता से 22.88 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि महिला ठगों के झांसे में नहीं आईं और फोन पर बात भी आगे नहीं बढ़ाई, लेकिन इसके बावजूद उनके बैंक खाते में सुरक्षित रकम तक साइबर अपराधियों की पहुंच हो गई। ठगों ने बैंक में कराई गई 22.88 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर पूरी रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दी। बैंक से मोबाइल पर ट्रांजेक्शन का मैसेज आने के बाद महिला को खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई। मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ग्रीन गैस कर्मचारी बनकर आया फोन

रकाबगंज निवासी 80 वर्षीय महिला अधिवक्ता का फेडरल बैंक में खाता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि 29 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का अधिकृत कर्मचारी बताया। उसने कहा कि उनके गैस कनेक्शन से संबंधित सब्सिडी की रकम खाते में भेजी जानी है। इसके लिए उन्हें महज 12 रुपये का भुगतान करना होगा। महिला ने बताया कि उन्होंने करीब एक साल पहले ही अपना पीएनजी कनेक्शन बंद कर दिया था। इसी वजह से उन्हें फोन पर संदेह हुआ। उन्होंने ठग से आगे कोई बातचीत नहीं की और कॉल काट दी।

ठगी से बचने के लिए बैंक पहुंचीं, लेकिन यहीं से शुरू हुआ दूसरा खेल

फोन कटने के बाद महिला ने अपनी रकम को और सुरक्षित करने के उद्देश्य से अगले दिन बैंक जाने का फैसला किया। बैंक पहुंचकर उन्होंने अपने बचत खातों में जमा करीब 22.88 लाख रुपये की एफडी करा दी। उन्हें लगा कि रकम एफडी में सुरक्षित रहेगी और साइबर ठग उस तक नहीं पहुंच पाएंगे। लेकिन महज दो दिन बाद ही उनकी पूरी रणनीति पर पानी फिर गया।

2 अक्टूबर को टूट गई 22.88 लाख की एफडी

2 अक्टूबर को महिला की एफडी तोड़ दी गई। इसके बाद एफडी की पूरी रकम खाते से ट्रांसफर कर दी गई। बैंक से मोबाइल पर मैसेज आने के बाद महिला को खाते में हुई इस बड़ी सेंधमारी की जानकारी हुई। उन्होंने तत्काल मामले की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस से की। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर रकम के ट्रांसफर, बैंक खाते और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।

एफडी की जानकारी साइबर ठगों तक कैसे पहुंची?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला ने जिस रकम को साइबर ठगी से बचाने के लिए एफडी कराया था, उसकी जानकारी अपराधियों तक कैसे पहुंची? बताया जा रहा है कि एफडी से संबंधित जानकारी सामान्य तौर पर बैंकिंग व्यवस्था में दर्ज रहती है। ऐसे में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि एफडी टूटने और रकम ट्रांसफर होने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर अंदरूनी जानकारी का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। हालांकि, अभी बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि नहीं हुई है और इसे केवल जांच के एक संभावित कोण के तौर पर देखा जा रहा है।

मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड होने की भी आशंका

जांच में साइबर पुलिस इस संभावना को भी खंगाल रही है कि कहीं महिला के मोबाइल में किसी संदिग्ध एपीके फाइल या लिंक के जरिए मालवेयर तो इंस्टॉल नहीं कराया गया था। यदि ऐसा हुआ होगा तो अपराधियों को मोबाइल या बैंकिंग गतिविधियों तक रिमोट एक्सेस मिलने की संभावना हो सकती है। ऐसी स्थिति में बैंकिंग संबंधी ओटीपी अथवा अन्य संवेदनशील जानकारी अपराधियों तक पहुंच सकती है। हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम वास्तव में किस तरीके से निकाली गई।

ग्रीन गैस के नाम पर पहले भी निशाने पर आ चुके हैं लोग

ग्रीन गैस कंपनी के नाम पर साइबर ठगी का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक आगरा में ग्रीन गैस के करीब 1.10 लाख कनेक्शन हैं। इनमें लगभग 75 हजार कनेक्शन चालू, जबकि करीब 35 हजार कनेक्शन बंद हैं। आशंका है कि साइबर अपराधी गैस कनेक्शन से संबंधित उपलब्ध डाटा का इस्तेमाल कर लोगों को फोन कर रहे हैं। पहले कनेक्शन की जानकारी देकर भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है और फिर सब्सिडी, बिल या रिफंड के नाम पर मामूली रकम जमा कराने का झांसा दिया जाता है। बताया जा रहा है कि इस तरह के मामलों में आगरा में अब तक 20 से 25 लोग साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद इस नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।

12 रुपये से शुरू हुआ झांसा, लाखों की रकम पर नजर

इस घटना में ठगों ने बेहद मामूली रकम का लालच देकर बातचीत शुरू की थी। उनका निशाना 12 रुपये नहीं, बल्कि बैंक खाते में जमा लाखों रुपये थे। महिला ने समय रहते फोन काट दिया, लेकिन इसके बावजूद अपराधियों ने उनके खाते में सेंध लगा दी। मामला यह सवाल भी खड़ा करता है कि यदि किसी ग्राहक ने संदिग्ध कॉल पर कोई ओटीपी साझा नहीं किया, किसी लिंक पर क्लिक नहीं किया और खुद ही रकम एफडी में सुरक्षित करा दी, तब भी उसके खाते से इतनी बड़ी रकम कैसे निकल गई। साइबर क्राइम पुलिस अब ट्रांजेक्शन की पूरी कड़ी, रकम जिस खाते में गई उसकी जानकारी, डिजिटल डिवाइस और बैंकिंग लॉग की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि इस साइबर ठगी के पीछे कौन सा तरीका और कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था।