धर्मेंद्र कश्यप के ‘टाटा बाय-बाय’ से गरमाई रुहेलखंड की सियासत, भाजपा से दूरी की अटकलों के बीच सपा में वापसी के संकेत

-आरके सिंह- बरेली। भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद पूर्व मंत्री और आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कुमार कश्यप के ‘टाटा बाय-बाय’ संदेश ने रुहेलखंड की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। राज्यसभा टिकट की दौड़ में खुद को दावेदार मान रहे कश्यप ने समुद्र किनारे सूर्यास्त की तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर यह संदेश पोस्ट किया। इसके बाद भाजपा से उनके अलग होने की अटकलें तेज हो गईं। हालांकि कश्यप ने अभी भाजपा छोड़ने या किसी दूसरे दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। पिछले दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात और अब समर्थकों की बैठकों ने सपा में वापसी की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

Oct 7, 2026 - 21:15
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धर्मेंद्र कश्यप के ‘टाटा बाय-बाय’ से गरमाई रुहेलखंड की सियासत, भाजपा से दूरी की अटकलों के बीच सपा में वापसी के संकेत
धर्मेंद्र कश्यप। 

पिछले दो दिनों से धर्मेंद्र कश्यप के आवास के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट रही है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने खिलाफ काम करने वालों और पार्टी के भीतर कथित तौर पर हुई साजिशों को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि 2024 में जिन लोगों ने खुलकर उनकी खिलाफत की और उन्हें हराने का काम किया, यदि वे पार्टी की अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे तो निश्चित तौर पर कष्ट होगा। कश्यप ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी कार्रवाई नहीं करती और कोई चिंता व्यक्त नहीं करती तो उनके जैसे स्वाभिमानी व्यक्ति का ‘टाटा बाय-बाय’ कहना स्वाभाविक है।

कश्यप ने भाजपा को संदेश देते हुए कहा, “जब से चला हूं मंजिल पर मेरी निगाह है, कभी मील का पत्थर नहीं देखा।” उनके आवास से भाजपा के बैनर-पोस्टर हटने और आगे की राजनीतिक राह के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा, “इसे बिल्कुल निश्चित ही मानिए।”

सपा में वापसी पर समर्थकों की राय अहम

धर्मेंद्र कश्यप ने अपने अगले राजनीतिक कदम का स्पष्ट ऐलान नहीं किया है, लेकिन सपा में वापसी के संकेत जरूर दिए हैं। सपा में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगला ठिकाना क्या होगा, यह बहुत जल्द सबके सामने आ जाएगा। उन्होंने बताया कि केवल आंवला ही नहीं, बल्कि पूरे बरेली मंडल और जनपद में समर्थकों की बड़ी बैठकें बुलाई जा रही हैं। कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राय लेने के बाद ही नए दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

पिछले महीने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से धर्मेंद्र कश्यप की मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी थी। ऐसे में समर्थकों की बैठकों और उनके हालिया बयानों को सपा में वापसी की संभावित तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

अपनी बेटी कीर्ति कश्यप की सक्रिय राजनीति और दातागंज से दावेदारी के सवाल पर धर्मेंद्र कश्यप ने कहा, “टिकट जहां से चाहेंगे, वहां से मिलेगा। पार्टी कोई भी हो, फैसला समर्थकों की बैठक में तय होगा।”

राज्यसभा टिकट से नाराजगी या भीतरघात का दर्द?

उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची में बरेली से कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को जगह मिली है। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में मामूली अंतर से हारने वाले धर्मेंद्र कश्यप को प्रत्याशी नहीं बनाया गया। कश्यप भले ही सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि राज्यसभा से उन्हें कोई खास मतलब नहीं था, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनकी नाराजगी को संगठन में कथित उपेक्षा और 2024 की हार के लिए जिम्मेदार माने जा रहे नेताओं को पार्टी में मिल रहे महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया प्रोफाइल से भाजपा से जुड़ी पहचान हटाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाली तस्वीर बदलने की चर्चाओं ने भी उनके भाजपा से अलगाव की अटकलों को और तेज किया है। हालांकि इन घटनाक्रमों के बावजूद कश्यप ने अभी तक भाजपा छोड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।

पंचायत से संसद तक पहुंचा राजनीतिक सफर

धर्मेंद्र कुमार कश्यप का राजनीतिक सफर जमीनी राजनीति से शुरू हुआ। वर्ष 1995 से 2000 तक वह क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे। वर्ष 2000 से 2002 के बीच जिला पंचायत सदस्य चुने गए। वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर तत्कालीन बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने।

सत्ता परिवर्तन के बाद 2003 से 2007 के बीच वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 2007 में सपा के टिकट पर दोबारा विधायक बने और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। वर्ष 2009 में सपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस नेता मेनका गांधी को करीब 7,681 मतों के अंतर से हराकर पहली बार लोकसभा पहुंचे।

वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने से पहले वह भाजपा में शामिल हुए। भाजपा के टिकट पर उन्होंने सपा के कुंवर सर्वराज सिंह को 1.38 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराकर दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीता। वर्ष 2019 में भाजपा के टिकट पर बसपा की रुचि वीरा को 1.13 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराकर दोबारा लोकसभा पहुंचे।

वर्ष 2024 में भाजपा ने उन्हें तीसरी बार आंवला से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन कड़े मुकाबले में वह सपा के नीरज मौर्य से 15,969 मतों के अंतर से चुनाव हार गए।

कश्यप मतदाताओं पर भी नजर

धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा से अलग होने की संभावित स्थिति को राजनीतिक हलकों में केवल एक पूर्व सांसद के दल बदलने के रूप में नहीं देखा जा रहा है। कश्यप रुहेलखंड में कश्यप बिरादरी के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। बरेली, आंवला, बदायूं और आसपास के क्षेत्रों में उनके समर्थकों का नेटवर्क माना जाता है।

ऐसे में यदि धर्मेंद्र कश्यप किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होते हैं और उनके समर्थक भी उनके साथ खड़े होते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ सकता है। खास तौर पर बरेली और बदायूं के कुछ क्षेत्रों में कश्यप मतदाताओं के रुख को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

धर्मेंद्र कुमार कश्यप का जन्म 1 जून 1968 को बरेली के कांधरपुर में हुआ। वह 10वीं पास हैं और कृषि से जुड़े हैं। उनके पिता का नाम महेंद्र पाल कश्यप, माता का नाम कुमारी दाई कश्यप और पत्नी का नाम सरोज कश्यप है। उनकी राजनीतिक पहचान उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और आंवला से दो बार लोकसभा सांसद के रूप में रही है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने या सपा में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। उन्होंने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद अपने अगले राजनीतिक कदम का ऐलान करने की बात कही है। ऐसे में उनका ‘टाटा बाय-बाय’ संदेश, भाजपा से दूरी के संकेत और अखिलेश यादव से मुलाकात ही उनकी अगली राजनीतिक दिशा को लेकर जारी अटकलों का आधार बने हुए हैं।

SP_Singh AURGURU Editor