कुत्ते के खून से इंसानी आपूर्ति की सुर्खियां बनती खबरें- नकली दवाओं से लेकर फर्जी सिस्टम और बेकाबू भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता भारतीय समाज

देश में मिलावट और फर्जीवाड़े का जाल खतरनाक स्तर तक फैलता दिखाई दे रहा है, जहां खून, दवाइयां, खाद्य सामग्री से लेकर प्रमाण पत्र और संस्थागत व्यवस्थाएं भी इसकी चपेट में हैं। निगरानी तंत्र की कमजोरी, लालच और जवाबदेही की कमी ने हालात को गंभीर बना दिया है। अब आवश्यकता केवल औपचारिक कार्रवाई की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर कठोर और त्वरित प्रहार करने वाले मजबूत तंत्र की है, तभी व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव हो सकेगा।

May 1, 2026 - 14:25
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कुत्ते के खून से इंसानी आपूर्ति की सुर्खियां बनती खबरें- नकली दवाओं से लेकर फर्जी सिस्टम और बेकाबू भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता भारतीय समाज

-डॊ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राजेश चौहान-

आज भारत के एक अंग्रेजी अखबार में सुर्खियों के साथ एक समाचार प्रकाशित हुआ है कि आवारा कुत्तों का खून निकालकर इंसानों की खून की आपूर्ति की जा रही है। पहले से पता भी होगा कि नकली खून भी बन रहा है। इसकी भी खबरें सामने आई हैं और नकली खून पकड़ा भी गया है। बहुत सारी नकली दवाएं भी बन रही हैं। इस्तेमाल की जा चुकी प्लास्टिक की नलियां व सुई इत्यादि भी धोकर दुबारा इस्तेमाल के लिए बेची जा रही हैं। कुछेक इस तरह की फैक्ट्री पकड़ी भी जाती रही हैं।

'किडनी ट्रांसप्लांट' तक करता बारहवीं पास एक युवक कुछ दिन पहले धरा गया। पिछले सालों में कई वह यह कारनामा कर भी चुका था। बोले तो सभी कुछ धड़ल्ले से चल रहा है और शायद ऐसा बढ़ता भी जा रहा है। आयुष मंत्रालय भी बन चुका है, और फिर भी गड़बड़ियां बढ़ती जा रही हैं। कई लोग एक साथ दो-दो, तीन-तीन अलग-अलग जगहों पर सरकारी नौकरी करते पाये जा रहे हैं, और सभी की तनख्वाह भी ले रहे हैं।

जिम्मेदारी निभाने वालों के ऊपर निगरानी रखने वाली अनेकों एजेंसियां हैं। पुलिस, शासन, प्रशासन, विधि पालक, आईएएस, आईपीएस, मंत्री से लेकर संतरी, सभी के लोगों के रहते हुए भी ऐसा होता ही जा रहा है। हम आखिर कैसे विश्व गुरु बनना चाह रहे हैं, और देश को कैसा बनवाते जाना चाह रहे हैं? कृपया ऐसा न कहें कि इसने विदेशी ताकतें हैं, और हम कर भी क्या सकते हैं। यह हमारी ताकत और बलबूते पर ही हो रहा है। पैसे की चाहत नकली नोट छापने के अड्डे बनवाती जा रही है, और इसमें कुछेक जगह तो धार्मिक संस्थान तक इसमें जुडी हुईं पाई गई हैं।

नकली मुद्रा के अलावा नकली बैंक भी पकडे जा रहे हैं। हाल ही में एक खबर थी कि बकरे के मांस में इंसान का मांस मिलाकर बेचा जा रहा था। अंत्येष्टि में इस्तेमाल अधजली लकड़ियां तंदूर मे रोटी सेंकने में प्रयोग में लाने की खबरें एक दो स्थानों से मिलीं। फेंके गये सेनिटरी नैपकिन भी पुनः पुनः धो-धो कर बेचे जा रहे हैं। नकली अफसर भी पकड़े जा रहे हैं।

नकली मार्कशीट, नकली डिग्री, नकली प्रमाण पत्र। यानि नकली हर क्षेत्र में घुस चुका है। और ऊपर से अब AI (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) का जमाना है, जो तोहमत के लिए हाजिर नाजिर है। पेट्रोल डीजल भी नकली आसानी से उपलब्ध हैं। असल में देखा जाये, तो क्या नहीं नकली मिल जायेगा? क्या कुछ भी अछूता रहा है? कई जगह मंदिरों में मूर्ति को अर्पित किये गये जेवर भी नकली मिले हैं। मूर्तियों पर अर्पित दूध भी नकली, और न चलने वाले नोट व सिक्के भी यदा-कदा चढ़ते ही रहते हैं।

आज देश अपने सांसदों और विधायकों की नफरी दुगनी करना चाह रहा है। क्या ऐसा करने से उपरोक्त सभी तरह के भ्रष्टाचार पर असर पड़ेगा? क्या होना चाहिये सुधार के लिए? क्या सस्पेंड करते रहने से सुधार आयेगा? एक नया मंत्रालय क्यों नहीं खड़ा किया जाता, जो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण करने मे सक्षम हो और उसकी मार भी जोरदार हो?

SP_Singh AURGURU Editor