सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश से आगरा में आईसीयू सेवाएं संकट में, 150 अस्पतालों पर लटकी तलवार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आगरा के लगभग 150 अस्पतालों के आईसीयू पर संकट मंडरा रहा है। स्वास्थ्य विभाग मई में सख्त निरीक्षण करेगा और मानक पूरे न होने पर गंभीर मरीजों की भर्ती पर रोक लग सकती है। आईसीयू के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, वेंटिलेटर और अन्य सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। करीब 80 अस्पतालों का पंजीकरण भी अधर में है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

Apr 30, 2026 - 13:07
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सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश से आगरा में आईसीयू सेवाएं संकट में, 150 अस्पतालों पर लटकी तलवार
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आगरा। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद आगरा के निजी और सरकारी अस्पतालों में संचालित आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने शहर के करीब 150 अस्पतालों के आईसीयू की व्यापक जांच का फैसला लिया है, जो मई माह में शुरू होगी।

जानकारी के अनुसार, जिन अस्पतालों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाया जाएगा, वहां गंभीर मरीजों की भर्ती पर रोक लग सकती है। इससे शहर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत आईसीयू संचालन के लिए अब सख्त मानक लागू किए गए हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, पर्याप्त वेंटिलेटर और अन्य लाइफ-सेविंग उपकरण अनिवार्य कर दिए गए हैं। साथ ही, तीन मरीजों पर कम से कम एक नर्स की तैनाती जरूरी होगी।

एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि आईसीयू किसी भी स्थिति में बेसमेंट में संचालित नहीं किया जा सकेगा। इसके पीछे सुरक्षा कारण और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तत्काल बाहर निकालने की सुविधा को ध्यान में रखा गया है।

हाल ही में शीला देवी हॉस्पिटल में बिना पंजीकरण आईसीयू संचालित होने पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की थी, जिससे अन्य अस्पतालों में भी हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 80 अस्पताल और लैब ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक ऑनलाइन आवेदन नहीं किया है, जिससे उनका पंजीकरण खतरे में पड़ गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध पंजीकरण और मानकों के आईसीयू  संचालन पूरी तरह अवैध माना जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग की टीम निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों की जांच, उपकरणों की स्थिति, स्टाफ की उपलब्धता और आईसीयू  की संरचना का बारीकी से मूल्यांकन करेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन, जुर्माना और संचालन पर रोक जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सख्त कदमों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, लेकिन अल्पकाल में आईसीयू  बेड की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ सकता है।