घर उजाड़ने से पहले बसेरा दो: सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत, पुनर्वास के बिना मथुरा के संजय नगर में कोई कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने संजय नगर, मथुरा के निवासियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि पुनर्वास से पहले अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होगी, जिससे हजारों लोगों को बेघर होने से अस्थायी सुरक्षा मिल गई है।
मथुरा। दशकों से बसे संजय नगर के हजारों निवासियों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना पुनर्वास किसी भी प्रकार की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत के इस सख्त रुख के बाद प्रशासन को पहले पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
23 अप्रैल 2026 को जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे के आधार पर संजय नगर निवासियों की अवमानना याचिका का निस्तारण करते हुए यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया।
50 साल पुराना बसाव, अब कानूनी लड़ाई का मोड़
संजय नगर में करीब 40-50 वर्षों से वाल्मीकि समाज के लोग सिंचाई विभाग की मथुरा एस्केप कैनाल के आसपास बसे हुए हैं। समय के साथ शासन-प्रशासन ने यहां राशन कार्ड, बिजली, पानी, हैंडपंप और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं, जिससे यह क्षेत्र स्थायी बस्ती के रूप में विकसित हो गया।
हाईकोर्ट के आदेश से मचा था हड़कंप
वर्ष 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र को अतिक्रमण मानते हुए लगभग 800 मकानों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ निवासियों ने अपने अधिवक्ता डा. राजीव शर्मा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल 2023 को याचिका पर राज्य सरकार को प्रभावित लोगों के पुनर्वास की योजना लाने का निर्देश दिया था।
जल्दबाजी में कार्रवाई पर कोर्ट सख्त
इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिस पर निवासियों ने अवमानना याचिका (संख्या 210/2026) दायर की। इसमें सिंचाई सचिव, जिलाधिकारी मथुरा और अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट में डा. राजीव शर्मा ने दलील दी कि दशकों से बसे लोगों को अचानक बेघर करना गंभीर अन्याय है और सरकार तीन साल में भी पुनर्वास नहीं कर पाई है।
सरकार का हलफनामा और कोर्ट का फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाकर कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया, जिसमें पहले पुनर्वास और बाद में कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
इस पर अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पुनर्वास प्रक्रिया पूरी किए बिना कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी और इसी आधार पर अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
निवासियों में राहत, अधिवक्ता का आभार
फैसले के बाद संजय नगर के निवासियों ने राहत की सांस ली और अपने अधिवक्ता डा. राजीव शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि डा. राजीव शर्मा आगरा जनपद के किरावली तहसील के ग्राम विधापुर के मूल निवासी हैं और लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के रूप में कार्यरत हैं।