एक साल तक विदश दौरे पर नहीं जाएंगे बालेन शाह, नेपाल की विदेश नीति में बड़ा बदलाव, विदेशी राजनयिकों से भी नहीं मिल रहे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश की विदेश नीति को बदलकर रख दिया है। इस बदलाव ने बड़े-बड़े कूटनीतिक जानकारों को भी चौंकाया है। बालेन शाह ने ऐलान किया है कि वह अगले एक साल तक विदेश दौरे पर नहीं जाएंगे। इसके अलावा वह नेपाल आने वाले शीर्ष विदेशी राजनयिकों से भी नहीं मिल रहे हैं।  

May 1, 2026 - 19:40
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एक साल तक विदश दौरे पर नहीं जाएंगे बालेन शाह, नेपाल की विदेश नीति में बड़ा बदलाव, विदेशी राजनयिकों से भी नहीं मिल रहे


काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कार्यभार संभालने के बाद कम से कम एक साल तक किसी भी विदेशी दौरे पर नहीं जाने का फैसला किया है। यह जानकारी सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सूत्रों ने दी है। बालेन शाह को भारत यात्रा पर आना था और दोनों देशों ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी थी। इस बीच बालेन शाह का विदेशी राजनयिकों से न मिलना भी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। वह न तो विदेशी राजदूतों से मिल रहे हैं और ना ही विदेश से आने वाले वरिष्ठ राजनयिकों से, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण एशिया के विशेष दूत और भारत के राजदूत सर्जियो गोर भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक साल तक विदेश न जाने का फैसला घरेलू विकास, सुशासन और आंतरिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2026 में शाह के शपथ लेने के बाद उन्हें भारत यात्रा का निमंत्रण दिया था। हालांकि, पीएम बालेन शाह का यह निर्णय पारंपरिक कूटनीतिक मानदंडों से हटकर है, जहां नेपाली प्रधानमंत्री अक्सर पदभार ग्रहण करने के बाद जल्दी ही विदेश यात्रा पर जाते हैं। पहले के नेपाली प्रधानमंत्रियों ने भी पहली विदेश यात्रा के तौर पर भारत का चुनाव किया है, लेकिन कुछ ने चीन की यात्रा भी की है।  

हाल में ही अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर ने नेपाल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री शिशिर खनाल, वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले और सत्ताधारी दल – राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने सहित कई प्रमुख हस्तियों से मुलाकात की, हालांकि प्रधानमंत्री बालेन शाह से नहीं मिल पाए।

इसी तरह, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर की काठमांडू यात्रा के दौरान भी बालेन शाह के साथ किसी भी तरह की मुलाकात नहीं हुई है। जबकि सर्जियो गोर की ओर से नेपाली प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए कई बार अनुरोध किया गया।

बालेन शाह ने प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल की विदेश नीति का पैटर्न ही चेंज कर दिया है। उन्होंने शपथग्रहण के कुछ दिनों बाद विभिन्न देशों के राजदूतों से अलग-अलग मिलने के बजाय, उनसे सामूहिक रूप से मुलाकात करना पसंद किया। विशेषज्ञों का मानना है कि हो सकता है कि यह कदम समानता या समय बचाने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है, लेकिन इसने राजनयिकों और पर्यवेक्षकों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नई सरकार किस तरह की कूटनीतिक संस्कृति और शैली स्थापित करना चाहती है।