एच-1बी वीजा पर ट्रंप का बड़ा एक्शन,  टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियां इस स्‍कीम से सस्‍पेंड,  अमेरिकी वीजा पर बढ़ी हलचल

अमेरिकी वीजा को लेकर हलचल तेज हो गई है। पीईआरएम स्कीम से टाटा, विप्रो, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई आईटी कंपनियों को हटा दिया गया है। एच-1बी वीजा के गलत इस्तेमाल और विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के आरोपों के बीच यह एक्‍शन लिया गया है। इसका भारतीयाें पर काफी असर पड़ने की आशंका है।

Oct 8, 2026 - 22:28
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एच-1बी वीजा पर ट्रंप का बड़ा एक्शन,  टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियां इस स्‍कीम से सस्‍पेंड,  अमेरिकी वीजा पर बढ़ी हलचल

वाशिंगटन। अमेरिकी वीजा को लेकर हलचल बढ़ गई है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम पर सख्ती बढ़ा दी है। एच-1बी वीजा के गलत इस्तेमाल और विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के आरोपों के बीच प्रशासन ने कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (पीईआरएम) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी और एचसीएल शुमार हैं। इस कदम का भारतीयों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

अमेरिका के उप राष्‍ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर आरोप लगाया कि कंपनी ने हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। दूसरी तरफ हजारों H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड का फायदा भी उठाया। प्रशासन ने वीजा से जुड़े प्रोग्राम्स के गलत इस्तेमाल को लेकर नौ यूनिवर्सिटीज की भी जांच शुरू कर दी है। इससे अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है।

पीईआरएम प्रोग्राम से माइक्रोसॉफ्ट को सस्पेंड करने की घोषणा करते हुए वेंस ने कहा कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का फायदा उठाया। वह बोले, 'दुर्भाग्य से, अमेरिका में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जिसने माइक्रोसॉफ्ट से ज्‍यादा सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया हो।'

व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने कहा, 'अगर आप हिसाब लगाएं तो माइक्रोसॉफ्ट ने जिस भी कर्मचारी को नौकरी से निकाला, उसकी जगह डेढ़ विदेशी 'बंधुआ मजदूर' को रख लिया।'  वेंस ने कंपनियों पर अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी कम करने के लिए विदेशी कर्मचारियों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'यह अमेरिकी कर्मचारी और अमेरिकी जीवनशैली का बुनियादी अपमान है। हम ऐसे वीजा प्रोग्राम्स का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी कम करने के लिए नहीं होने दे सकते, जिन्हें इसलिए बनाया गया था ताकि अमेरिकी कंपनियों को सबसे अच्छे और काबिल लोग मिल सकें!'

'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' प्रोग्राम या पीईआरएम लेबर डिपार्टमेंट की एक प्रक्रिया है जो अमेरिका के एम्प्लॉयर्स (नियोक्ताओं) को विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से नौकरी पर रखने के लिए सर्टिफिकेशन पाने की इजाजत देती है। इस प्रक्रिया के तहत एम्प्लॉयर्स को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि नौकरी के लिए पर्याप्त संख्या में काबिल, इच्छुक, योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं हैं। विदेशी कर्मचारी को नौकरी पर रखने से उसी तरह का काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी और काम की स्थितियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।

एक बार जब लेबर डिपार्टमेंट से लेबर सर्टिफिकेशन मंजूर हो जाता है तो एम्प्लॉयर अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज में इमिग्रेंट पिटीशन (आमतौर पर फॉर्म I-140 के जरिए) के साथ आगे बढ़ सकता है। लिहाजा, H-1B वर्कर्स के लिए PERM रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रोसेस में एक अहम कदम हो सकता है। किसी कंपनी की इस प्रोग्राम तक पहुंच रोकने से कंपनी के लिए योग्य विदेशी वर्कर्स को स्थायी निवास के लिए स्पॉन्सर करना मुश्किल हो सकता है।

पीईआरएम प्रोग्राम को यह पक्का करने के लिए बनाया गया है कि जब एम्प्लॉयर स्थायी नौकरियों के लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना चाहें तो अमेरिकी वर्कर्स को नुकसान न हो। ग्रीन कार्ड के लिए किसी विदेशी वर्कर को स्पॉन्सर करने से पहले एम्प्लॉयर को आम तौर पर यह दिखाना होता है कि उस पद के लिए पर्याप्त योग्य, इच्छुक और उपलब्ध US वर्कर्स नहीं हैं। विदेशी वर्कर को हायर करने से उसी तरह की नौकरी करने वाले अमेरिकियों की मजदूरी और काम की स्थितियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिकी अधिकारियों की चिंता तब बढ़ती है जब एम्प्लॉयर इस लेबर-मार्केट टेस्ट में हेरफेर करते हैं या इसे नजरअंदाज करते हैं। धोखाधड़ी वाली भर्ती से ऐसा लग सकता है कि कोई उपयुक्त अमेरिकी वर्कर उपलब्ध नहीं है, जबकि असल में योग्य यूएस वर्कर्स को आवेदन करने से हतोत्साहित किया गया हो सकता है या उन्हें विचार करने से प्रभावी ढंग से बाहर रखा गया हो सकता है। लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल ने पीईआरएम सिस्टम में कमियों की पहचान की है। इसमें धोखाधड़ी वाले आवेदन, अपर्याप्त सहायक दस्तावेज और सर्टिफिकेशन के बाद लागू करने में कमजोरियां शामिल हैं।