रसखान की समाधि पर सांझी के विविध रंग, पानी पर तैरती कला ने मोहा दर्शकों का मन

महावन (मथुरा)। सांझी महोत्सव-2026 के दूसरे दिन बुधवार को रसखान समाधि परिसर में सांझी कला के पारंपरिक और नए प्रयोगों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। पानी पर तैरती सांझी से लेकर गोबर और पोर्ट्रेट पर उकेरी गई सांझी तक कलाकारों ने इस प्राचीन ब्रज कला के विविध रूप प्रस्तुत किए। बड़ी संख्या में पहुंचे वैष्णव तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं ने कलाकारों से सांझी निर्माण की बारीकियां भी जानीं।

Oct 7, 2026 - 20:58
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रसखान की समाधि पर सांझी के विविध रंग, पानी पर तैरती कला ने मोहा दर्शकों का मन
मथुरा के महावन में रखखान की समाधि पर चल रहे सांझी महोत्सव के दूसरे दिन सांझी कला का अवलोकन करतीं महिलाएं। अन्य चित्रों में कला का प्रदर्शन करते कलाकार।

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में वृंदावन के प्रसिद्ध चित्रकार विश्वजीत और उनके साथी कलाकारों ने पानी पर तैरती हुई सांझी तैयार की। कलाकारों ने महोत्सव में पहुंचे लोगों को सांझी बनाने की प्रक्रिया से भी जोड़ा। वृंदावन के रसिक वल्लभाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की गाय चराते हुए वनलीला का सांझी के माध्यम से सुंदर चित्रण किया।

खजानी वूमेन पॉलिटेक्निक की छात्राओं ने पोर्ट्रेट पर सांझी तैयार की। धौलीप्याऊ निवासी सेवानिवृत्त प्राचार्य उमा जी ने भी पोर्ट्रेट पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को उकेरा। मिर्जापुर की चित्रकार खुशबू ने सांझी निर्माण की प्रक्रिया में भाग लिया। बलदेव पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने प्रीति चौहान के निर्देशन में पोर्ट्रेट पर सांझी की आकर्षक रचनाएं तैयार कीं। श्रुति कुमारी सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। दक्ष एजुकेशन से जुड़ी छात्राओं ने सांझी बनाकर अपनी प्रतिभा दिखाई, जबकि परिसर में रंगोली भी सजाई गई।

महोत्सव में सांझी के पारंपरिक स्वरूप को भी जीवंत किया जा रहा है। आगरा की सुनीता और अनुष्का तथा गोकुल की लक्ष्मी ने गोबर से पारंपरिक सांझी तैयार की। पोर्ट्रेट पर सांझी के माध्यम से कलाकार ब्रज की कला और कृष्णलीला को नए माध्यम में प्रस्तुत कर रहे हैं। कार्ष्णि इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने भी रंगोली बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

बुधवार को बड़ी संख्या में वैष्णव तीर्थयात्री रसखान समाधि परिसर पहुंचे। गोकुल के पंकज बाबा के परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सांझी निर्माण देखा और कलाकारों से इसकी बारीकियों की जानकारी ली। तीर्थयात्री ब्रह्मांड घाट, चिंताहरण तथा यमुना पार के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन के बाद रसखान समाधि पहुंचे।

लोकगीत और भजनों से गूंजा परिसर

महोत्सव के दूसरे दिन साइकिल दलवीर ब्रजवासी और उनके साथियों ने ब्रज के लोकगीतों की प्रस्तुति दी। गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन के गीत प्रोजेक्ट प्रभारी महेश चंद्र शर्मा के निर्देशन में गुरुकुल के बच्चों ने गीता से संबंधित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लोकगीतों और भजनों की प्रस्तुतियों से रसखान समाधि परिसर भक्तिमय हो उठा।

SP_Singh AURGURU Editor