नवीन राष्ट्रीय सहकारी नीति पर मंथनः सरकारों और साहूकारों के कब्जे से मुक्त हो सहकारी व्यवस्था

बिचपुरी, आगरा स्थित राजा बलवंत सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी में शनिवार को नवीन राष्ट्रीय सहकारी नीति पर आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में पैक्स और जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कार्यक्रम ने न केवल सहकारिता की अवधारणा को नई दिशा दी, बल्कि सहयोग आधारित शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं का भी विस्तार किया।

Nov 15, 2025 - 13:36
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नवीन राष्ट्रीय सहकारी नीति पर मंथनः सरकारों और साहूकारों के कब्जे से मुक्त हो सहकारी व्यवस्था
बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट में नवीन सहाकरी नीति पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले अतिथिगण।

आगरा। नवीन राष्ट्रीय सहकारी नीति के माध्यम से पैक्स और सहकारी संस्थाओं के सशक्तिकरण विषयक जागरूकता कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जब तक सरकार या साहूकारों के कब्जे से सहकारी व्यवस्था मुक्त नहीं होगी तब तक सारे प्रयास बेमानी हैं। सहकारिता के क्षेत्र में अब तक जो भी काम हुए है, वे केवल दूध के क्षेत्र में हुए है। सरकारी हस्तक्षेप के कारण दूसरे क्षेत्र में सहकारी व्यवस्था पनप नहीं पाई। यूपी में पराग डेरी इसका स्पष्ट उदाहरण है।

यह कार्यक्रम सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के सहयोग से राजा बलवंत सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी, बिचपुरी में आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं राजा बलवंत सिंह के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॊ. आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशुरानी, संस्थान की प्राचार्य प्रो. सीमा भदौरिया, डीबीएसएसएल के एमडी चेतन जोशी, सहज मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के सीईओ डॉ. प्रफुल्ल भानुवाडिया, कोऑपरेटिव हेड जेपी सिंह, डिविजनल रजिस्ट्रार बीके मिश्रा, आयोजन सचिव और सहकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. पीके सिंह तथा सहकार भारती के आगरा मंडल संयोजक राकेश कुमार शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

अपने स्वागत भाषण में प्राचार्य प्रो. सीमा भदौरिया ने सहकारिता क्षेत्र में यूपी के एकमात्र महाविद्यालय बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट के सहकारिता क्षेत्र में अग्रणी योगदान और प्रस्तावित “इंडिया कोऑपरेटिव एलायंस” परियोजना की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व सहकारिता के समन्वय से समाज और छात्रों का समग्र विकास संभव है।

डॊ. भीमराव आंबेडकर विवि की कुलपति प्रो. आशूरानी ने कहा कि वे प्रयास करेंगी कि विश्वविद्यालय में सहकारिता को अलग से विषय के रूप में मान्यता मिले।

कार्यक्रम के दौरान सहकारी समिति लिमिटेड के एमडी चेतन जोशी ने सहकारिता क्षेत्र के नए अवसरों और उनकी संस्था द्वारा विकसित 'शक्ति एप' एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी, जो किसानों की कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
वहीं, की-नोट स्पीकर डॉ. ओमवीर सिंह ने सहकारी योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि सहकारिता, भविष्य के विकसित भारत का आधार है। उन्होंने सहकारी व्यवस्था को सरकार और साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने पर जोर दिया तथा कहा कि ऐसा होने पर ही हम सहकारिता का लाभ आम लोगों को दिला पाएंगे।
सहज मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के सीईओ डॉ. प्रफुल्ल भानुवाडिया ने कार्यक्रम में सहकारिता की शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को कंपनी में रोजगार अवसर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिससे छात्रों के लिए सीधा प्लेसमेंट संभव हो सकेगा।

कार्यक्रम के दौरान सहकार भारती के नेतृत्व में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत एक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों की स्वास्थ्य जांच की गई।

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए आयोजन सचिव प्रो. पीके सिंह ने उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में आरबीएस कॉलेज कृषि विज्ञान केंद्र, आरबीएस टेक्निकल कैंपस सहित विभिन्न विभागों के प्रो. के. सिंह, प्रो. सुनील कुमार, प्रो. सूरजमुखी, प्रो. आशुतोष भंडारी, डॉ. शिखा घर, डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. संजय कुमार, डॉ. नीतिश कुमार शर्मा, डॉ. भोपाल सिंह सहित दर्जनों शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। छात्र-छात्राओं, ग्राम प्रधानों, सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों, पैक्स सदस्यों, किसानों की भी मौजूदगी रही।

SP_Singh AURGURU Editor