साहित्य की ‘अनुभूति’ का विलयन: आगरा की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्या सक्सेना नहीं रहीं
आगरा। 'अनुभूति', 'जिंदगी दर्द है', 'यात्रा', 'इंद्रधनुष', 'मृगतृष्णा' और 'ड्रीम ऑफ़ ए लेडी' सहित सात पुस्तकों की रचनाकार आगरा की वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ. श्रीमती सत्या सक्सेना (85 वर्ष) का निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत समेत हर किसी को यूं लगा जैसे 'जिंदगी दर्द है' की 'अनुभूति' कर एक पथिक अंतिम 'यात्रा' पर निकल गया हो।
विगत चार महीने से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहीं सत्या सक्सेना की सेवा में जुटे उनके इकलौते पुत्री-दामाद सोनिया सभरवाल और संजय सभरवाल ने बताया कि उनकी मां ने मंगलवार सुबह 5:30 बजे हीराबाग दयालबाग स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली।
साहसिक और मार्मिक रही लेखनी
डॉ. श्रीमती सत्या सक्सेना ने कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण और यात्रा वृतांत सहित साहित्य की कई महत्वपूर्ण विधाओं में साहसिक और मार्मिक लेखन किया। उनके नारी विषयक ज्वलंत मुद्दों पर आलेख और भावना प्रधान कविताएं जिसने भी सुनीं या पढ़ीं, वह उनका मुरीद हो गया।
उम्र के इस दौर में भी अक्सर अस्वस्थ रहने के बावजूद वह प्रेम, करुणा और पुकार में आकंठ डूबे गीत लिखती और गुनगुनाती रहती थीं। उनकी बड़ी अभिलाषा थी कि उनके जीते जी ऐसे गीतों का संग्रह 'जोगी प्यार के' शीर्षक से प्रकाशित हो.. क्या कहें! क्या करें! उनकी यह अभिलाषा अधूरी ही रह गई। दुनिया से रुखसत हो गए जोगी प्यार के...।
साहित्यसेवियों ने प्रकट कीं शोक संवेदनाएं
उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर छा गई। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र मिलन ने लिखा, 'सत्या जी का जाना बेहद दुखी समाचार है किंतु हम इस प्राकृतिक विधान में मूक खडे़ हैं.. कुछ कर भी तो नहीं सकते..' वरिष्ठ साहित्यकार शीलेंद्र वशिष्ठ ने लिखा, 'वह साधक कवयित्री थीं। उनकी कविताओं में गहरी संवेदनाएं मुखर होती हैं।' डॉ. शशि तिवारी ने लिखा, 'बहुत ही दुखद। सत्या जी ने मुझे सदा बहुत प्यार दिया।'
डॉ. नीलम भटनागर, डॉ. शशि गुप्ता, पंडित महेश चंद्र शर्मा 'गोपाली', वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यसेवी आदर्श नंदन गुप्त, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की पूर्व सदस्य रोली तिवारी मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, शांति नागर, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. सुषमा सिंह, शलभ भारती, डॉ. राजकुमार रंजन, रिटायर्ड जज चंद्रभाल श्रीवास्तव, डॉ. ब्रज बिहारी बिरजू, दिनेश संन्यासी, डॉ. शिखरेश, अशोक अश्रु, डॉ. पुनीता पांडेय पचौरी, अमीर अहमद जाफरी, संजय गुप्त, वरिष्ठ पत्रकार आनंद शर्मा, डॉ. महेश धाकड़, सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने भी शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं।
गीत वियोगी प्राणों का अभिनंदन है..
कवि कुमार ललित ने उन्हें याद करते हुए कहा कि मां स्वरूप डॉ. सत्या जी से अक्सर हम अनुरोध करके उनके इस मार्मिक गीत को सुनते थे.. उनके दिव्य स्वर में 'गीत वियोगी प्राणों का अभिनंदन है..' गीत हमारे मन प्राणों में गहरे उतर जाता था। हमें नहीं पता था कि एक दिन सचमुच ही उनके प्राण वियोगी हो जाएंगे और हम निष्प्राण से उनको याद करते रह जाएंगे...।अब मुझे फोन करके कौन कहेगा, बेटा ललित! तुम्हारी याद आ रही है। थोड़ी देर के लिए ही सही, पर आ जाओ..। आपकी बहुत याद आएगी मां.....