फिरोजाबाद में डीएम बनाम तहसीलदार विवाद ने पकड़ा तूल: आरोपों की आंच में प्रशासन, सियासत गरम
टूंडला/फिरोजाबाद। टूंडला की निवर्तमान तहसीलदार राखी शर्मा द्वारा फिरोजाबाद के जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद प्रशासनिक ही नहीं, राजनीतिक हलकों में भी हलचलें तेज हो गई हैं। आरोप-प्रत्यारोप के इस सिलसिले ने अब तूल पकड़ लिया है और मामला प्रशासनिक दायरे से निकलकर सियासी रंग ले चुका है। तहसीलदार राखी शर्मा का दावा है कि कथित बैनामा प्रकरण के दोषियों को बचाने के लिए उनके खिलाफ नैतिक, अनैतिक और अमर्यादित आचरण सहित भ्रष्टाचार के आरोप गढ़े जा रहे हैं।
इसी बीच प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिला है। तहसीलदार राखी शर्मा का तबादला शिकोहाबाद तहसील कर दिया गया है, जबकि टूंडला में नए तहसीलदार ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वहीं रेखा शर्मा चार दिन के अवकाश पर चली गई हैं, जिससे पूरे प्रकरण के बीच प्रशासनिक तंत्र में असहज स्थिति बनी हुई है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब भाजपा जिलाध्यक्ष से संबंधित एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें तहसीलदार पर आरोपों का उल्लेख था। इस पत्र के सामने आने के बाद सत्ता पक्ष के जिलाध्यक्ष भी आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। साथ ही, सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं द्वारा जिलाधिकारी पर सवाल उठाए जाने से यह विवाद पूरी तरह राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, तीन बाबुओं द्वारा एक कीमती जमीन के बैनामों की जांच इस विवाद की जड़ मानी जा रही है। तहसीलदार खुद को साजिश का शिकार बता रही हैं, जबकि जिला प्रशासन और कुछ राजनीतिक नेता उनके आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दे रहे हैं। इस खींचतान के बीच प्रशासनिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
तहसीलदार राखी शर्मा ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि एक मजिस्ट्रेट होने के बावजूद घर से बाहर निकलने में डर लग रहा है और पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। उन्होंने बताया कि उनकी परेशानी की खबर सुनकर उनके पिता उनके पास आए, लेकिन यहां के हालात देखकर उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। राखी शर्मा का कहना है कि उनका चरित्र हनन करने के भी हथकंडे अपनाये जा रहे हैं।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है, जिसमें तहसीलदार ने दावा किया है कि जिलाधिकारी द्वारा उपयोग किया जा रहा आईफोन उन्होंने स्वयं खरीदकर दिया था। इस संबंध में उन्होंने संबंधित बिल भी प्रस्तुत किया है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
फिलहाल, जिलाधिकारी की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सबकी निगाहें संभावित जांच और उच्चाधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि यह मामला उच्च स्तर, विशेषकर मुख्यमंत्री स्तर पर पहुंचता है, तो इसकी जांच के दायरे में कई चेहरे आ सकते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस विवाद का प्रशासनिक व राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है।