संसद में डीलिमिटेशन बिल का समर्थन कर सकती हा डीएमके, सर्वदलीय बैठक में दिया संकेत, सरकार से साफ प्रस्ताव की मांग

 डीएमके ने साफ किया कि नए परिसीमन बिल में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। पार्टी का कहना है कि सरकार को पहले अपना स्पष्ट प्रस्ताव सामने रखना चाहिए। 

Jul 19, 2026 - 14:48
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संसद में डीलिमिटेशन बिल का समर्थन कर सकती हा डीएमके, सर्वदलीय बैठक में दिया संकेत, सरकार से साफ प्रस्ताव की मांग


चेन्नई। संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल को लेकर डीएमके का रुख चर्चा का विषय बन गया। आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि डीएमके ने परिसीमन बिल का समर्थन किया है। हालांकि, डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने साफ कहा कि सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट प्रस्ताव पेश नहीं किया है और पार्टी को इस मुद्दे पर सरकार से और स्पष्टता चाहिए। इसके बाद परिसीमन बिल को समर्थन देने पर विचार किया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, डीएमके ने बैठक में कहा कि महिला आरक्षण को मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या के आधार पर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए। इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की जरूरत नहीं है।

डीएमके ने साफ किया कि नए परिसीमन बिल में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। पार्टी का कहना है कि सरकार को पहले अपना स्पष्ट प्रस्ताव सामने रखना चाहिए। यदि नए परिसीमन से दक्षिण भारत की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित होती है तो परिसीमन को अगले 25 वर्षों के लिए स्थगित (फ्रीज) करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, डीएमके चाहती है कि बिल में स्पष्ट रूप से लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी का प्रावधान लिखा जाए। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में इसका मौखिक आश्वासन दिया था। पार्टी का कहना है कि यदि यह बात विधेयक में शामिल की जाती है, तो वह सकारात्मक रुख अपना सकती है।

फिलहाल सरकार ने मानसून सत्र में डीलिमिटेशन बिल को पेश करने की सूची में शामिल नहीं किया है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि समय आने पर सरकार के पास विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन होगा।

पिछले कुछ महीनों में डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल को लेकर डीएमके का रुख काफी नरम हुआ है। माना जा रहा है कि पार्टी के इस बदलाव से संसद में समीकरण भी बदल सकते हैं। संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए के लिए डीएमके का रुख अहम माना जा रहा है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने और इंडिया गठबंधन से अलग होने के बाद डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में भी दूरी बढ़ी है। अब डीएमके ने संकेत दिए हैं कि वह डीलिमिटेशन बिल पर फैसला कांग्रेस के साथ मिलकर नहीं, बल्कि इस आधार पर करेगी कि इसका तमिलनाडु के हितों पर क्या असर पड़ता है।