आईवीआरआई बरेली में देश-विदेश के डॊक्टर पशु शल्य चिकित्सा की नई तकनीकें सीख रहे
-आरके सिंह- बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर बरेली छोटे-बड़े पशुओं की सर्जरी में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। यहां न केवल देश बल्कि विदेश से भी पशु चिकित्सक प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। वर्तमान में संस्थान में पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के पशु चिकित्साधिकारियों को पांच दिवसीय “हैंड्स ऑन ट्रेनिंग ऑन सॉफ्ट टिशू सर्जरी इन एनीमल्स” दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत पशुओं के लीवर, आंत, पथरी, फ्रैक्चर और अन्य अंगों की शल्य चिकित्सा सिखाई जा रही है।
सोमवार को आयोजित उद्घाटन समारोह में संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. एस. के. मेदिरत्ता ने कहा कि प्रशिक्षण में चिकित्सकों को न केवल बीमारियों की पहचान बल्कि निदान और शल्य चिकित्सा तकनीकों पर हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने बताया कि संकाय के विशेषज्ञ आर्थोपेडिक्स, प्लेटिंग, इंटरलाकिंग नेल और डायनेमिक इंटरनल फिक्सेशन जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जिनका लाभ प्रशिक्षणार्थियों को मिलेगा।
शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. किरणजीत सिंह ने कहा कि यह पाठ्यक्रम क्षेत्रीय स्तर पर चिकित्सकों की जरूरतों को पूरा करने और उनके कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय नेटवर्क कार्यक्रम (AINP-DIMSCA) ने इस तरह के प्रशिक्षण को शुरू करने के लिए उपयुक्त मंच उपलब्ध कराया है।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. अभिषेक सक्सेना ने कहा कि इस पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्रशिक्षुओं का आत्मविश्वास बढ़ाना, उनके ज्ञान को ताज़ा करना और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर नई तकनीकों में दक्ष बनाना है। इससे वे अपने अस्पतालों में सामान्य सर्जरी से शुरुआत कर जटिल सर्जरी तक करने में सक्षम हो सकेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. रेखा पाठक ने बताया कि इस पाठ्यक्रम में जनरल सर्जरी से संबंधित समस्याओं पर विशेष जोर दिया गया है। इससे चिकित्सकों का आत्मविश्वास स्तर बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विभाग में पशुओं के फ्रैक्चर और शल्य चिकित्सा संबंधी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और यहां कई डिजाइनों व पेटेंट्स का विकास किया गया है। यही कारण है कि आईवीआरआई भारत में पशु रोगों के निदान और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान रखता है।