राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस से आगे निकले डोनाल्ड ट्रम्प
वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रकपति चुनाव में अब मात्र दो सप्तािह ही बचे हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मी दवार कमला हैरिस को बड़ा झटका लगा है। पहली बार ताजा चुनावी सर्वेक्षण में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीोदवार डोनाल्डल ट्रंप ने निवर्तमान उपराष्ट्रषपति कमला हैरिस को पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका में पांच नवंबर को राष्ट्र पति चुनाव होने हैं। डिसिजन डेस्कद हिल के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक राष्ट्र्पति चुनाव में जीत के मामले में डोनाल्डै ट्रंप अब कमला हैरिस से चार प्रतिशत आगे निकल गए हैं। डोनाल्डन ट्रंप की जीत का अनुमान अब 52 प्रतिशत है, वहीं कमला हैरिस के जीतने की संभावना अब केवल 48 फीसदी ही है।
डिसिजन डेस्क ने बताया कि ट्रंप भले ही अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में कमला हैरिस से 'थोड़ा सा' आगे निकल गए हैं लेकिन अभी तक परिणाम साफ नहीं है। इस बार कौन राष्ट्रपति बनेगा, इसका फैसला अमेरिका के स्विंग स्टेट करेंगे। ट्रंप को विस्कोंसिन और मिशिगन में बढ़त मिलती दिख रही है। साथ ही एरिजोना, जार्जिया और उत्तरी कैरोलिना में ट्रंप की पहले से चली आ रही बढ़त बनी हुई है। हालांकि सात चुनावी राज्यों नेवादा, एरिजोना, जार्जिया, नॉर्थ कैरिलोना, पेन्सिल्विनिया, मिशिगन और विस्कोंसिन में चुनावी परिणाम कुछ भी हो सकता है।
माना जा रहा है कि ये राज्य ही फैसला करेंगे कि किसे जीत के लिए 270 वोट मिलते हैं। ताजा अनुमानों के मुताबिक अभी न तो ट्रंप और न ही कमला हैरिस को स्पष्ट रूप से यह नंबर हासिल है। कमला हैरिस के नाम के ऐलान से पहले ट्रंप लगातार सर्वेक्षण में बाइडन पर बढ़त बनाए हुए थे लेकिन अब लोगों का नजरिया बदल रहा है। इस बीच वरिष्ठ भारतीय अमेरिकी नेता स्वदेश चटर्जी ने कहा है कि अमेरिका में रह रहा भारतीय समुदाय पांच नवंबर को होने वाले चुनाव में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को वोट देने से हिचकिचा रहा है, क्योंकि सीनेटर या कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के रूप में अपनी पिछली भूमिकाओं में हैरिस ने भारतीय समुदाय के बीच अपना जनाधार विकसित नहीं किया।
वर्ष 2001 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित भारतीय समुदाय के डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े नेता ने इंडियन अमेरिकन्स फॉर हैरिस नामक समूह बनाया है, जो उपराष्ट्रपति के पक्ष में न सिर्फ कैलिफोर्निया में चुनाव प्रचार कर रहा है बल्कि अन्य राज्यों में भी उपराष्ट्रपति का समर्थन कर रहा है। चटर्जी ने स्वीकार किया है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय उन्हें भारी मत देने से हिचकिचा रहा है, क्योंकि वे उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानते। उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के रूप में हैरिस ने भारतीय अमेरिकी समुदाय में अपना जनाधार नहीं बनाया और सीनेटर के रूप में वह समुदाय की किसी भी बैठक या उनके किसी भी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनीं।