डा. केएस राना ने सुझाया खाद्यान्न संकट का हल, कई देशों के राजनयिकों ने मंथन कर यूएन को भेजा प्रस्ताव

नई दिल्ली। यहां निर्यात भवन में लगभग 25 देशों के राजनयिकों ने इस बात पर मंथन किया कि दुनिया की भूख कैसे मिटाई जाए। ओमान के ट्रेड कमिश्नर डा. केएस राना ने इस विषय पर अपना प्रजेंटेशन दिया और सभी राजनयिकों ने इस पर चर्चा करने के बाद एक प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र को भेजा है। 

Oct 18, 2024 - 20:54
Oct 18, 2024 - 21:47
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डा. केएस राना ने सुझाया खाद्यान्न संकट का हल, कई देशों के राजनयिकों ने मंथन कर यूएन को भेजा प्रस्ताव
नई दिल्ली के निर्यात भवन में इंटरनेशनल फूड डे पर आयोजित कार्यक्रम में डा. केएस राना एवं अन्य।

इंटरनेशनल फूड डे पर हुए इस कार्यक्रम में अफ्रीकी देशों के अलावा लैटिन अमेरिकी देशों के दो दर्जन राजनयिक शामिल हुए। इस कार्यक्रम में चर्चा का विषय था, दुनिया की भूख का इंतजाम कैसे किया जाए। 

डा. केएस राना ने इस पर अपना प्रजेंटेशन देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, क्राप पैटर्न के साथ ही हमें पानी बचाने के लिए मिलेट्स जैसी इस तरह की क्राप तैयार करनी होंगी कि पर्याप्त खाद्यान्न पैदा हो सके। लोगों की भूख भी मिट सके और पानी का भी बचाव हो। प्रो. राना ने कहा कि यह स्थिति बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक तरफ खाना बर्बाद होता है और दूसरी तरफ दुनिया में बड़ी संख्या में लोग भूखे सोते हैं। 

डॉक्टर राना ने कहा कि दुनिया के स्टार होटलों में फ़ूड बेकार जाने पर कड़े प्रतिबंध लागू होने चाहिए। इसके साथ ही पानी के बहुलता वाली फ़सलों को नियंत्रित किया जाए। श्वेत क्रांति, ब्लू क्रांति के संयुक्त राष्ट्र के एफएओ की पुरानी नीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

प्रोफेसर राना ने कहा कि मिलेट्स की फसल को बढ़ावा मिले क्योंकि 2050 के बाद पानी का अभाव दुनिया को घेर लेगा, जिसके लिए अभी से सतर्क रहने की जरूरत है। जो अफ़्रीकी, लैटिन अमेरिकी  देश गरीबी और भुखमरी से जूझ रहे हैं कि उनकी ज़रूरत पूरी करने को सम्पन्न देश खुले मन से सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है कि दुनिया समय रहते इस ओर सोचे और सार्थक कदम उठाए। 

जब टाटा को जुर्माना भरना पड़ा था 

अपने संबोधन के दौरान डॉक्टर राना ने स्वर्गीय रतन टाटा से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि बर्लिन के एक होटल में अधिक खाना मंगाने और फिर थाली में  झूठा छोड़ने पर रतन टाटा को जुर्माना भरना पड़ा था। इस घटना को विस्तार से बताते हुए डॉ राना ने पूरे विश्व को संदेश देने की कोशिश की कि खाने की बर्बादी रोकें।

SP_Singh AURGURU Editor