मौत के बाद भी जिंदगी बांट गए डॉ. सुपार्श्व जैन: नेत्र, त्वचा और देहदान से मानवता को नई रोशनी
आगरा। जीवन के अंतिम क्षणों में भी मानवता की मिसाल कायम करते हुए खंदारी स्थित सिद्धार्थ अपार्टमेंट निवासी 88 वर्षीय डॉ. सुपार्श्व सिंह जैन ने मृत्यु के बाद भी कई जिंदगियों को रोशन करने का संदेश दिया। उनके निधन के बाद परिवार ने एक अत्यंत संवेदनशील और प्रेरणादायक निर्णय लेते हुए नेत्रदान, त्वचा दान और देहदान कर समाज के सामने सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
दिल्ली में निधन, रात 2 बजे हुआ नेत्र और त्वचा दान
18 मार्च को दिल्ली में डॉ. सुपार्श्व सिंह जैन का निधन हो गया। शोक की इस घड़ी में भी परिवार ने हिम्मत और संवेदनशीलता दिखाते हुए उसी रात 2 बजे उनके नेत्रों और त्वचा का दान कराया, जिससे जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिलने का रास्ता खुला।
अगले ही दिन एम्स को देहदान, मेडिकल शिक्षा को मिलेगा सहयोग
इसके बाद 19 मार्च की सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को देहदान कर दिया गया, जहां यह मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य में उपयोग होगा। इस पहल से चिकित्सा शिक्षा को भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
परिवार ने निभाई मानवीय जिम्मेदारी, समाज को दिया संदेश
डॉ. सुपार्श्व सिंह जैन, हेल्प आगरा संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन के बहनोई थे। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने इस निर्णय को समाज के लिए नई दिशा देने वाला कदम बताया।
संस्था के महामंत्री गौतम सेठ, पूर्व अध्यक्ष मुकेश जैन, रामसरन मित्तल, अशोक गोयल, पूर्व महासचिव किशन अग्रवाल, अजय मित्तल, नेत्रदान एवं देहदान प्रभारी प्रतीक जैन तथा मीडिया प्रभारी नंदकिशोर गोयल सहित अन्य सदस्यों ने परिवार की इस पहल को सराहते हुए कहा कि यह कदम न केवल दो अंधकारमय जीवनों में रोशनी लाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा।
मानवता का सबसे बड़ा दान है जीवन के बाद भी जीवन देना
डॉ. जैन के इस महान दान से जहां नेत्रहीनों को नई दृष्टि मिलेगी, वहीं उनका शरीर मेडिकल छात्रों के लिए ज्ञान का माध्यम बनेगा। यह घटना बताती है कि इंसान अपने जाने के बाद भी समाज के लिए कितना बड़ा योगदान दे सकता है।
इस पुनीत कार्य से जुड़ने के इच्छुक लोग 9319111000 पर संपर्क कर सकते हैं और किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी बन सकते हैं।