नाटक नहीं रुकेगा: राजेन्द्र रघुवंशी की आत्मकथा 'स्वगत कथन' का भव्य लोकार्पण

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, खंदारी परिसर स्थित सभागार में नाट्य लेखक, पत्रकार और रंगकर्मी राजेन्द्र रघुवंशी की आत्मकथा 'स्वगत कथन' का लोकार्पण समारोह भावपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

Jul 19, 2025 - 19:21
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नाटक नहीं रुकेगा: राजेन्द्र रघुवंशी की आत्मकथा 'स्वगत कथन' का भव्य लोकार्पण
नाट्य पितामह राजेन्द्र रघुवंशी की आत्मकथा स्वगत कथन का शनिवार को विवि के खंदारी परिसर सभागार में लोकार्पण करते वीरेंद्र यादव, राकेश वेदा, प्रो. कमलेश नागर, दिलीप रघुवंशी एवं अन्य अतिथिगण।  

-नाट्य पितामह की संघर्ष गाथा को दस्तावेज़ बना रही 'स्वगत कथन', इप्टा और संस्कृति जगत की नामचीन हस्तियों की मौजूदगी रही

कार्यक्रम की शुरुआत नाट्य पितामह कहे जाने वाले रघुवंशी जी के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुई। इसके बाद आगरा इप्टा के कलाकारों ने संगीत निर्देशक परमानंद शर्मा के निर्देशन में रघुवंशी द्वारा लिखे प्रेरक गीतों की सामूहिक प्रस्तुति- 'बाधक हो तूफान बबंडर', 'नाटक नहीं रुकेगा', और 'वारी जोगनिया तेरे लागूंर को चिरैया लेकर उड़ गई...' जैसे गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

आत्मकथा का वैचारिक दृष्टिकोण: प्रस्तावना से झलका जीवन-दर्शन

कार्यक्रम में 'स्वगत कथन' की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए संपादक डॉ. ज्योत्स्ना रघुवंशी ने कहा कि यह पुस्तक राजेन्द्र रघुवंशी के जीवन का आइना है। राजेंद्र रघुवंशी जीवन संघर्षों के बीच किन परिस्थितियों में बड़े हुए और उस दौरान उन्होंने जो रास्ता चुना, उस सामाजिक-राजनीति जीवन का परिदृश्य पुस्तक में चित्रित है। जिसने उनके व्यक्तित्व को स्वरूप दिया, जिसका प्रतिफल हमें उनके लेखन, पत्रकारिता, सांस्कृतिक और सामाजिक क्रियाकलापों में दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि यह आत्मकथा केवल संस्मरण नहीं, बल्कि उनके जीवन का वैचारिक प्रतिबिंब है।

समीक्षा और वक्तव्यों में उभरा दस्तावेजी महत्व

समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रो. कमलेश नागर ने कहा कि आगरा की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के विकास में रघुवंशी जी की भूमिका बेहद सक्रिय और संगठक रही। उन्होंने कई संस्थाओं को गति दी और मंच को आवाज़ दी।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि 'स्वगत कथन' केवल आत्मकथा नहीं, इतिहास और विरासत का जीवंत दस्तावेज है, जिसमें एक समृद्ध परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की झलक है।

इप्टा की यादें और योगदान

इप्टा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राकेश वेदा ने 'स्वगत कथन' की प्रासंगिकता पर विस्तार से बात करते हुए 1985 के आगरा इप्टा कन्वेंशन की चर्चा की, जिसमें रघुवंशी जी के नेतृत्व में इप्टा को राष्ट्रीय स्वरूप मिला। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक इप्टा के इतिहास लेखन में मील का पत्थर बनेगी।

'नाटक नहीं रुकेगा': वृत्तचित्र का प्रदर्शन

समारोह में राजेन्द्र रघुवंशी के जीवन पर आधारित लघु फिल्म 'नाटक नहीं रुकेगा' का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म का लेखन एवं निर्देशन दिलीप रघुवंशी ने किया। कोरस गायन में असलम खान, मुक्ति किंकर, जय कुमार, मिथुन चौहान की भागीदारी रही।

इनकी मौजूदगी थी उल्लेखनीय

अतिथियों का स्वागत कुमकुम रघुवंशी, प्रमोद सारस्वत और भावना रघुवंशी ने किया। समारोह का संचालन हरीश चिमटी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन दिलीप रघुवंशी ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में अनेक साहित्यप्रेमी और शहर की प्रतिष्ठित हस्तियाँ मौजूद रहीं, जिनमें प्रमुख थे- डॉ. जवाहर सिंह धाकरे, डॉ. शशि तिवारी, पूरन सिंह, नीरज मिश्रा, प्रो. नसरीन बेगम, डॉ. सुषमा सिंह, रविंद्र रघुवंशी, अनिल शुक्ला, डॉ. युवराज सिंह, ओमप्रकाश प्रधान, मीतेन रघुवंशी, सिद्धार्थ रघुवंशी, अनिल जैन, उमाशंकर मिश्रा, गिरीश गुप्ता, शरद गुप्ता आदि।

SP_Singh AURGURU Editor