मथुरा में दवा फैक्ट्री घोटाला, फर्जी बैंक सत्यापन से 15–20 करोड़ की इकाई हड़पने का आरोप, साझेदार पर एफआईआर
मथुरा। मथुरा में स्थित दवा निर्माण इकाई मै. ग्लैमसन हेल्थ केयर को लेकर एक गंभीर आर्थिक और आपराधिक विवाद सामने आया है। फर्म के सह–संस्थापक डॉ. शोभित गुप्ता ने अपने ही साझेदार अरुण शर्मा सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच कराते हुए कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कर ली है।
मथुरा। मथुरा में स्थित दवा निर्माण इकाई मै. ग्लैमसन हेल्थ केयर को लेकर एक गंभीर आर्थिक और आपराधिक विवाद सामने आया है। फर्म के सह–संस्थापक डॉ. शोभित गुप्ता ने अपने ही साझेदार अरुण शर्मा सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच कराते हुए कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कर ली है।
डॉ. शोभित गुप्ता के अनुसार वर्ष 2016 में उन्होंने और अरुण शर्मा ने संयुक्त रूप से मै. ग्लैमसन हेल्थ केयर की स्थापना की थी। दोनों की साझेदारी 50–50 प्रतिशत की थी। यह दवा निर्माण इकाई यूपीएसआईडीसी के प्लॉट संख्या K-6, एनएच-2, रिफाइनरी गेट नंबर-1 के सामने स्थापित की गई, जहां दवाइयों का नियमित उत्पादन हो रहा था और फर्म का संचालन संयुक्त रूप से किया जा रहा था।
आरोप है कि कुछ समय बाद अरुण शर्मा ने फर्म के उत्पादों को अपनी निजी फर्म के नाम से बाजार में बेचना शुरू कर दिया और व्यक्तिगत लाभ अर्जित करने लगा। जब इस पर आपत्ति जताई गई तो विवाद गहराता चला गया। अंततः साझेदारी समाप्त करने को लेकर एक समझौता हुआ, जिसमें करीब 15 से 20 करोड़ रुपये की मौजूदा मार्केट वैल्यू वाली इकाई को डॉ. शोभित गुप्ता के पास रखने और इसके बदले अरुण शर्मा को 1.50 करोड़ रुपये भुगतान करने पर सहमति बनी।
डॉ. शोभित गुप्ता का आरोप है कि अरुण शर्मा ने तय रकम का भुगतान किए बिना ही फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी जानकारी और सहमति के बिना फर्म की साझेदारी नवीन चौधरी (वृंदावन) को बेच दी। जब उन्हें इस संदिग्ध हस्तांतरण की जानकारी मिली तो उन्होंने यूपीएसआईडीसी से सवाल किया कि उनकी अनुमति के बिना फैक्ट्री का ट्रांसफर कैसे कर दिया गया।
इस पर यूपीएसआईडीसी की ओर से एचडीएफसी बैंक का एक कथित वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट दिखाया गया, जिसके आधार पर हस्तांतरण किया गया था। डॉ. शोभित गुप्ता ने बताया कि इस प्रमाणपत्र में उनके कथित हस्ताक्षरों का बैंक सत्यापन दर्शाया गया था, जो बाद में पूरी तरह फर्जी निकला। संबंधित बैंक ने लिखित रूप में पुष्टि की है कि ऐसा कोई भी सत्यापन प्रमाणपत्र बैंक द्वारा जारी नहीं किया गया।
डॉ. शोभित गुप्ता का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने इस पूरे मामले में अरुण शर्मा से जवाब मांगा तो उन्हें धमकी तक दी गई। इसके अलावा उन्होंने यूपीएसआईडीसी आगरा कार्यालय के कुछ कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन पर बिना समुचित जांच और उनकी सहमति के हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी करने का आरोप है। उन्होंने 29 जुलाई 2025 को यूपीएसआईडीसी कार्यालय में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद डॉ. शोभित गुप्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। एसएसपी ने मामले की जांच एसपी सुरक्षा को सौंपी। एसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने कोतवाली पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे प्रकरण में दस्तावेजों, बैंक सत्यापन और यूपीएसआईडीसी की भूमिका की गहन जांच कर रही है।