चंबल और उटंगन के जलस्तर में उफान से किसानों के बाजरा की फसल हुई जलमग्न
पिनाहट ब्लॉक क्षेत्र से बहने वाली चंबल नदी का जलस्तर बीते दो दिनों में तेजी से बढ़ा है। राजस्थान के कोटा बैराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर 121 मीटर तक पहुंच गया। फिलहाल चंबल का स्तर स्थिर है, लेकिन खतरे की स्थिति बनी हुई है।
-कोटा बैराज से छोड़ा गया दो लाख क्यूसेक पानी, चंबल नदी का जलस्तर स्थिर हुआ लेकिन उटंगन में उफान जारी
नदी में उफान से किनारे के खाली खेतों में भरा पानी।
उटंगन नदी में भी अचानक उफान, कई पुलिया डूबीं
राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते उटंगन नदी में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी के उफान से कई गांवों की पुलियाओं पर पानी बह रहा है, जिससे आवाजाही बंद हो गई है। ग्रामीणों को अब अपने ही क्षेत्र में आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों की चिंता बढ़ी, खेतों में घुसा पानी
उटंगन नदी के उफान से नदी किनारे बसे गांवों के बाजरा सहित अन्य फसलों वाले खेतों में पानी भर गया है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका बढ़ गई है। खेतों में पानी रुकने से फसलें सड़ने का खतरा भी बना हुआ है।
बाढ़ चौकियां सक्रिय, प्रशासन सतर्क
चंबल, यमुना और उटंगन नदी क्षेत्रों में प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी हैं। निगरानी दल लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
स्टीमर सेवा बंद, कांवड़ियों और यात्रियों को भारी परेशानी
चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण स्टीमर सेवा बंद कर दी गई है, जिससे कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालु और ग्रामीण यात्रियों को परेशानी हो रही है। लोग प्रशासन से जल्द स्टीमर सेवा दोबारा चालू करने की मांग कर रहे हैं ताकि आवागमन सामान्य हो सके।
गांवों के संपर्क मार्गों पर खतरा, अलगाव की आशंका
जलस्तर बढ़ने से कई संपर्क मार्गों पर पानी भरने की स्थिति बन गई है। यदि यही हालात रहे तो कई गांवों का आपस में संपर्क कट सकता है। प्रशासन को अब तत्काल राहत एवं आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है।