इकोकार्डियोग्राफी से खुलेगा दिल की बीमारी का राज, दवा या सर्जरी का फैसला होगा आसान

आगरा में आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ के दूसरे दिन होटल होलीडे इन में इकोकार्डियोग्राफी की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग वर्कशॉप हुई। इसमें विशेषज्ञों ने एमडी छात्रों और युवा चिकित्सकों को दिल की मांसपेशियों, वाल्व, इजेक्शन फ्रैक्शन, हार्ट ट्यूमर, खून के थक्के और दिल के आसपास पानी जमा होने जैसी स्थितियों की जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। डॉ. शरद पालीवाल ने हृदय रोगों के निदान में इकोकार्डियोग्राफी की उपयोगिता बताई। विशेषज्ञों ने आईसीयू और इमरजेंसी में प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता पर जोर दिया। आगरा, फिरोजाबाद और मथुरा समेत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों ने कार्यशाला में भाग लिया।

Oct 25, 2026 - 18:40
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इकोकार्डियोग्राफी से खुलेगा दिल की बीमारी का राज, दवा या सर्जरी का फैसला होगा आसान
कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 के अंतर्गत होटल होलीडे इन में आयोजित ईको वर्कशॉप में विचार व्यक्त करते डॉ. अनुराग जैन। सामने उपस्थित हैं मेडिकल स्टूडेंट्स के साथ आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता एवं अन्य।

कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 में विशेषज्ञों ने दी इकोकार्डियोग्राफी की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, एमडी छात्रों ने सीखी आधुनिक तकनीकें

आगरा। हृदय रोगों की समय पर पहचान और मरीजों को सही उपचार उपलब्ध कराने में इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इस तकनीक के माध्यम से दिल की मांसपेशियों की ताकत, वाल्व की स्थिति, हृदय की कार्यक्षमता और दिल के आसपास जमा पानी जैसी गंभीर समस्याओं का सटीक आकलन किया जा सकता है। इससे चिकित्सकों को यह निर्णय लेने में मदद मिलती है कि मरीज का उपचार दवाइयों से किया जा सकता है या उसे तत्काल किसी विशेष प्रक्रिया अथवा सर्जरी की आवश्यकता है।

यह जानकारी आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ के दूसरे दिन रविवार को होटल होलीडे इन में आयोजित ‘हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग इको वर्कशॉप’ में विशेषज्ञों ने दी। कार्यशाला में पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को इकोकार्डियोग्राफी की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। इसका उद्देश्य चिकित्सकों को हृदय रोगों की पहचान करने, जांच के परिणामों को समझने और मरीजों के उपचार के लिए सही निर्णय लेने में अधिक सक्षम बनाना था।

दिल की मांसपेशियों से लेकर वाल्व की खराबी तक की जांच का प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से हृदय की संरचना और कार्यप्रणाली का आकलन करने की तकनीकें सिखाई गईं। इसमें दिल के वाल्व और मांसपेशियों की ताकत की जांच, इजेक्शन फ्रैक्शन (Ejection Fraction) का सही आकलन तथा वाल्वुलर हार्ट डिजीज की पहचान प्रमुख रूप से शामिल रही। इसके अलावा हार्ट ट्यूमर, हृदय में खून का थक्का जमने, पेरिकार्डियल एफ्यूजन यानी दिल के आसपास पानी जमा होने और पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर स्थितियों के निदान में इकोकार्डियोग्राफी की उपयोगिता पर भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इकोकार्डियोग्राफी से प्राप्त जानकारी के आधार पर चिकित्सक मरीज की स्थिति की गंभीरता का आकलन कर सकते हैं। विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार मरीजों में समय पर सही जांच होने से उपचार की दिशा निर्धारित करने में मदद मिलती है।

डॉ. शरद पालीवाल ने समझाया इकोकार्डियोग्राफी का महत्व

इकोकार्डियोग्राफी के क्षेत्र में विगत 40 वर्षों से कार्यरत प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. शरद पालीवाल ने हृदय रोगों के निदान में इस तकनीक के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में इकोकार्डियोग्राफी हृदय की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों को बताया कि जन्मजात हृदय रोगों से लेकर दिल की मांसपेशियों की कमजोरी और हार्ट अटैक के बाद होने वाले नुकसान तक, कई स्थितियों में इकोकार्डियोग्राफी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती है।

बच्चों के दिल में छेद होने जैसी जन्मजात समस्याओं की पहचान, हृदय के आकार में बदलाव, वाल्व की खराबी और दिल के आसपास तरल पदार्थ जमा होने की स्थिति का आकलन करने में भी यह तकनीक उपयोगी है। डॉ. पालीवाल ने समझाया कि जांच के निष्कर्षों से चिकित्सकों को मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार की योजना बनाने में मदद मिलती है। इससे यह तय करने में सहायता मिलती है कि दवाइयों से उपचार पर्याप्त होगा या किसी विशेष प्रक्रिया अथवा सर्जरी पर विचार करना जरूरी है।

आईसीयू और इमरजेंसी में प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत

विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. अनुराग जैन और डॉ. जय बाबू ने कहा कि आपातकालीन विभागों और आईसीयू में इको मशीन के साथ प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता बेहद जरूरी है। गंभीर मरीजों में हृदय की स्थिति का शीघ्र आकलन उपचार संबंधी निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि केवल मशीन की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को उसका सही इस्तेमाल करने तथा जांच के परिणामों को समझने का व्यावहारिक ज्ञान भी होना चाहिए। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को ‘हैंड्स-ऑन’ ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे इकोकार्डियोग्राफी के बुनियादी सिद्धांतों को गहराई से समझ सकें और भविष्य में अपने चिकित्सीय कार्यों में इसका प्रभावी उपयोग कर सकें।

कई मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 के आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा चिकित्सकों के कौशल को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इकोकार्डियोग्राफी के व्यावहारिक ज्ञान से मरीजों का समय पर निदान करने, उनकी स्थिति के अनुसार उपचार निर्धारित करने और उन्हें उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन देने में मदद मिल सकती है। इसका अंतिम उद्देश्य गंभीर हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और अमूल्य जीवन बचाने के प्रयासों को मजबूत करना है।

कार्यशाला में आगरा मेडिकल कॉलेज, फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज, एफएच मेडिकल कॉलेज, केडी मेडिकल कॉलेज, मथुरा सहित आसपास के क्षेत्रों के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एमडी कर रहे विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव, एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह, डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल और डॉ. चंदन कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे। देवेंद्र ढल ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि सुरेश सिंह ने व्यवस्थाएं संभालीं। आयोजन में भूपेंद्र भदौरिया और बीएल राजपूत का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यशाला के माध्यम से युवा चिकित्सकों को आधुनिक हृदय जांच तकनीक का व्यावहारिक अनुभव देने और गंभीर हृदय रोगों के बेहतर निदान की दिशा में उनकी दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया।