ब्रज की सांझी कला के संरक्षण के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रयास सभी ने सराहे
मथुरा। रसखान समाधि पर आयोजित सांझी महोत्सव के तीसरे दिन ब्रज की प्राचीन सांझी कला पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने सांझी कला संरक्षण में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अतुलनीय प्रयासों की सराहना की और सांझी की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया।
संगोष्ठी में कथा वाचक मोहिनी कृष्णदासी ने कहा कि ब्रज की सांझी कला को बचाने का प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने सांझी पर आधारित कविता सुनाई, जिसे उपस्थितजनों ने खूब सराहा। वृंदावन पब्लिक स्कूल की प्रवक्ता डॉ. अनीता चौधरी ने सांझी कला की प्राचीन परंपरा और उसके संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।
गोकुल की पूर्व सभासद प्रवीना तिवारी ने गोकुल के बल्लभ संप्रदाय के मंदिरों में सांझी की समृद्ध परंपरा और इसके आयोजन के तरीकों की जानकारी दी। वृंदावन के सांझी कलाकार विश्वजीत ने मंदिरों में सजने वाली सांझी के महत्व और निर्माण प्रक्रिया समझाई।
संगोष्ठी में चित्रकार कमलेश्वर और साहित्यकार निशा रावत ने सांझी कला को व्यवसायिक दृष्टि से जोड़ने के महत्व पर बल दिया। दक्ष एजुकेशन संस्था और खजानी सोसायटी के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन गीता शोध संस्थान के कोआर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया।
ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा ने सभी वक्तागण को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। जीएलए विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि अनुपम यादव और सुनील शर्मा ने वक्ताओं को पटुका पहनाकर सम्मानित किया।
संगोष्ठी के उपरांत ओपन एअर थियेटर में राधाचरण और बिहारीशरण की भजन संध्या हुई, जिसे जिला विकास अधिकारी गरिमा खरे ने सम्मानित किया।
महोत्सव में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और तीर्थ यात्री भी पहुंचे। उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी के सदस्य अनिल सोनी ने सांझी का अवलोकन किया। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश शर्मा और रामवीर सिंह यादव ने भी महोत्सव का निरीक्षण किया।