आगरा के होटल से विदेशों में बैठे साइबर ठगों के आठ हैंडलर गिरफ्तार, 42 एटीएम कार्ड, 11 चेकबुक, नौ मोबाइल फोन, एक कार, नेपाली मुद्रा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले, साइबर ठगी का इंटरनेशनल नेटवर्क हुआ बेनकाब
आगरा। आगरा पुलिस की एक संयुक्त, रणनीतिक और दक्ष कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है, जिसमें होटल में बैठकर करोड़ों की ऑनलाइन ठगी की साजिश रच रहे आठ आरोपियों को दबोच लिया गया है। गिरोह के पास से 42 एटीएम, 11 चेकबुक, 9 मोबाइल, नेपाल की मुद्रा, कार सहित भारी मात्रा में संदिग्ध सामान बरामद हुआ। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का संचालन व्हाट्सऐप ग्रुप से होता था और सभी आरोपी विदेशों में बैठे साइबर ठगों के सीधे संपर्क में थे, जिनके निर्देश पर भारत में फर्जी खाते खुलवाकर ठगी की रकम को रोटेट कर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जाता था।

साइबर ठगों के बारे में जानकारी देते एडीसीपी आदित्य कुमारः
साइबर सेल, सर्विलांस टीम, साइबर काउंटर इंटेलिजेंस और थाना ताजगंज पुलिस की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि शहर के एक होटल में साइबर फ्रॉड का गिरोह गुप्त बैठक कर बड़ी ठगी की तैयारी कर रहा है। इस जानकारी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने होटल में दबिश दी और मौके से आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली, आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज और फिरोजाबाद के युवक शामिल हैं, जो लंबे समय से साइबर फ्रॉड में सक्रिय थे।
पुलिस टीम को मौके से 42 एटीएम कार्ड, 11 चेकबुक, 9 मोबाइल फोन, एक कार, नेपाली मुद्रा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले। प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि यह गिरोह विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में था और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से ठगी के पूरे मेकानिज्म को संचालित करता था। गिरोह के सदस्य भोले-भाले और गरीब लोगों को झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम डाली जाती थी। हर ट्रांजेक्शन पर इन स्थानीय हैंडलर्स को दो प्रतिशत कमीशन मिलता था, जबकि खाते देने वाले व्यक्ति को मामूली राशि पकड़ा दी जाती थी।


ठगों से बरामद सिम कार्ड व अन्य सामग्री।
एडीसीपी आदित्य कुमार ने बताया कि गिरोह के कुछ सदस्य विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और वहां से सीखे गए सॉफ्टवेयर और तकनीक का इस्तेमाल भारत में ठगी के लिए कर रहे थे। विदेशों में बैठे ठग किसी विशेष मशीन और सॉफ्टवेयर के जरिए कार्ड डिटेल डालते थे, जिससे बैंक से स्वतः ट्रांजेक्शन शुरू हो जाता था। इसके बाद रकम अलग-अलग खातों में रोटेट कर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड्स तक पहुंचाई जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों में से तीन सीधे विदेशी ऑपरेटर्स के संपर्क में थे और उनके पास से कुछ विदेशी आईडी भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क तीन लेयर में काम करता था। पहले विदेशी मास्टरमाइंड, फिर भारत में बैठे हैंडलर्स और सबसे नीचे गरीब व अनजान लोगों को फंसा कर खुलवाए गए म्यूल अकाउंट्स। पकड़े गए आरोपी कई राज्यों में साइबर ठगी, चोरी, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट जैसे मामलों में वांछित भी हैं।
थाना ताजगंज में इनके खिलाफ धारा 318(4)/111(3)/61(2) B.N.S. में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और विदेशी लिंक को भी ट्रेस कर रही है।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई ने न सिर्फ बड़े साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, बल्कि उन तकनीकी तरीकों को भी उजागर किया है जिनकी मदद से ठग विदेशों से भारत में ऑनलाइन फ्रॉड को संचालित कर रहे थे।
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