एक कदम गांधी के साथः संविधान और नैतिकता की रक्षा को निकली पदयात्रा कल पहुंच रही आगरा
वाराणसी से राजघाट दिल्ली तक चल रही ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा कल आगरा पहुंचेगी। यह यात्रा केवल कदमों की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नैतिकता की रक्षा का प्रतीक बन गई है। विशेष बात यह है कि यात्रा में हर जाति, धर्म, भाषा और वर्ग के लोग शामिल हैं, जो हर सुबह सर्वधर्म समभाव से अपने दिन की शुरुआत करते हैं। गांधी के विचारों और प्रेम के संदेश को लेकर यह यात्रा नफरत के माहौल में सद्भाव का दीप जलाने निकली है।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की पुकार
पदयात्रा संयोजक राम धीरज ने कहा कि जब संविधान लागू हुआ, तब हर भारतीय इस देश का ‘मालिक’ बना। लेकिन आज जब नागरिक भयभीत है, तो लोकतंत्र भी भयग्रस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर नागरिक डर गया, तो लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
राम धीरज ने साफ कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य वर्तमान शासन के नफरत के माहौल को खत्म कर, उसकी जगह प्रेम और नैतिकता का वातावरण स्थापित करना है।
आगरा में प्रवेश और कार्यक्रमों की रूपरेखा
पदयात्रा आज शाम टुंडला पहुंच चुकी है। कल टूंडला से शुरू होकर यात्रा शाम 6 से 7 बजे तक गांधी स्मारक, रामबाग, आगरा पर पहुंचेगी। यहीं यात्रा का रात्रि विश्राम होगा। 11 नवंबर को दोपहर में यात्रा आगरा कॉलेज में पहुंचेगी। यहां के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शशीकांत पांडे बनाये गये हैं। इसी दिन यानि 11 नवंबर को हरियाली वाटिका, घटिया आजम खां में रात्रि विश्राम करेगी। यहां के समन्वयक वरिष्ठ कांग्रेस नेता भारत भूषण (गप्पी भाई) होंगे। यात्रा अगले दिन यानि 12 नवंबर को गुरु का ताल गुरुद्वारा, आगरा में पहुंचेगी। 13 नवंबर को अरतौनी और 14 नवंबर: हिंदुस्तान कॉलेज (मथुरा रोड) दोपहर में यात्रा का पड़ाव होगा।
देशभर से जुड़ रहे गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता
यात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, महिला संगठक और युवा शामिल हैं। प्रमुख सहभागी हैं राम धीरज (संयोजक), चंद्रमोहन पराशर (स्थानिक संयोजक), डॉ. सत्येंद्र यादव (पूर्व सर्कल प्रमुख), अवधेश यादव (पूर्व सीडीओ), चंदन पाल, अरविंद कुशवाहा, अरविंद अंजुम, भूपेश भूषण, सिस्टर फ्लोरीन, सरिता बहन, सौरभ, विवेक मिश्र, विशाल जैन, हिमेंद्र सहित अनेक साथी शामिल हैं।
यह लड़ाई सबकी हैः संदेश में एकता और साहस
राम धीरज ने कहा कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक और नागरिक चेतना की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं ने आज़ादी के लिए जो कुर्बानियां दीं, उसे यह सरकार तानाशाही रवैये से कुचल रही है। यह देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने जनता से अपील की कि जो जितने कदम चल सके, वह इस आंदोलन से जुड़ें, क्योंकि यह यात्रा ‘निर्भय भारत’ के निर्माण का संकल्प है।