‘एक टूटी हुई कुर्सी’ ने ताजनगरी को किया आत्ममंथन के लिए मजबूर, रिश्तों और जीवन की उलझनों का सशक्त मंचन

आगरा। साल के आखिरी सप्ताह में ताजनगरी के रंगमंच पर एक ऐसा नाटक मंचित हुआ, जिसने दर्शकों को रिश्तों, स्मृतियों और जीवन की आपाधापी के बीच छिपे दर्द से रूबरू करा दिया। शनिवार को यूथ हॉस्टल, आगरा में प्रस्तुत नाटक “एक टूटी हुई कुर्सी” ने पुराने रिश्तों में दबी भावनाओं, अधूरे संवादों और समय के साथ बदलते इंसानी मनोभावों को गहराई से उजागर किया।

Dec 27, 2025 - 22:45
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‘एक टूटी हुई कुर्सी’ ने ताजनगरी को किया आत्ममंथन के लिए मजबूर, रिश्तों और जीवन की उलझनों का सशक्त मंचन
“एक टूटी हुई कुर्सी” नाटक का मंचन करते कलाकार।

आगरा। साल के आखिरी सप्ताह में ताजनगरी के रंगमंच पर एक ऐसा नाटक मंचित हुआ, जिसने दर्शकों को रिश्तों, स्मृतियों और जीवन की आपाधापी के बीच छिपे दर्द से रूबरू करा दिया। शनिवार को यूथ हॉस्टल, आगरा में प्रस्तुत नाटक “एक टूटी हुई कुर्सी” ने पुराने रिश्तों में दबी भावनाओं, अधूरे संवादों और समय के साथ बदलते इंसानी मनोभावों को गहराई से उजागर किया।

नाट्यकर्म थिएटर द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का निर्देशन युवा निर्देशिका मन्नू शर्मा ने किया। मंच पर घटित होती घटनाओं को देखते हुए दर्शकों के मन में बार-बार यही सवाल कौंधता रहा, क्या वाकई एक टूटी हुई कुर्सी भी बहुत कुछ कह जाती है?

नाटक की निर्देशिका एवं नाट्यकर्म संस्था की सचिव मन्नू शर्मा ने बताया कि यह नाटक प्रसिद्ध लेखक इस्माइल चुनारा के मूल अंग्रेजी नाटक “ए ब्रोकन चेयर ” का हिंदी रूपांतरण है। इसका हिंदी अनुवाद उमा झुनझुनवाला द्वारा किया गया है। कहानी तीन पुराने दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके भीतर वर्षों से दबा दर्द, उलझन और अधूरी बातें अचानक सामने आ जाती हैं। नाटक की सशक्त अभिनय प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधे रखा। हर दृश्य में रिश्तों की परतें खुलती रहीं और दर्शक कहीं न कहीं अपने जीवन के अनुभवों से इसे जोड़ते नजर आए।

कार्यक्रम के दौरान नाट्यकर्म थिएटर की ओर से विशिष्ट अतिथियों का सम्मान भी किया गया। राजेश अग्रवाल (रसोई रत्न) के सुपुत्र अनुराग अग्रवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव वशिष्ठ और वरिष्ठ रंगकर्मी अजय दुबे को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अतिथि अनुराग अग्रवाल ने कहा कि थिएटर केवल अभिनेता बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास के लिए भी बेहद जरूरी है। इससे युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की कला विकसित होती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव वशिष्ठ ने चिंता जताते हुए कहा कि आगरा में थिएटर की परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे नाटक शहर में लगातार होने चाहिए। उन्होंने यूथ हॉस्टल में पहली बार नाटक होते देखने की बात कहते हुए नाट्यकर्म संस्था के प्रयासों की सराहना की और इसे रंगमंच के लिए एक सकारात्मक पहल बताया।

पात्र एवं तकनीकी टीम

रवि की भूमिका — रंजीत गुप्ता

अज़ीज़ की भूमिका — सार्थक भारद्वाज

सुमित्रा की भूमिका — कनिका सिंह

संगीत परिकल्पना एवं संचालन — अक्षय प्रताप

प्रकाश परिकल्पना — चंद्रशेखर

कार्यक्रम का संचालन शशांक शर्मा ने किया। वहीं दीपक निगम, राहुल मिलन, सचिन, तुषार वर्मा, नंदिता गर्ग, पृथ्वी पाराशर सहित अन्य सदस्यों ने व्यवस्थाएं संभालीं।